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संडे स्पेशलः तो उज्ज्वल होगा बदनाम गली की बेटी का भविष्य

Sun, 27 Dec 2020 06:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा राजीव कुमार, नई दिल्ली
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जीबी रोड के दलदल से निकाली गई बच्ची। पुलिस उपायुक्त के साथ मां, बेटी और उन्हे नया जीवन दिलाने वाली दिल्ली पुलिस की सब इंस्पेक्टर किरण सेठी। - फोटो : amar ujala
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करीब दस दिन पहले की बात है। तबीयत खराब होने से शबनम (बदला हुआ नाम) अपने कमरे में बैठी हुई थी। वह दिल्ली की बदनाम गली जीबी रोड पर रहती है। तभी उसकी पांच साल की बेटी अंदर आई। लड़की ने मां का उतरा चेहरा देख सवाल किया। सेहत खराब होने की बात सुन बच्ची गले लग गई और तुतलाती जुबान में कहा, मां बड़ी होकर डॉक्टर बनूंगी, तब तुमको कभी बीमारी नहीं होगी।

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यह पहली बार नहीं था, जब शबनम के सामने बच्ची ने पढ़ने और डॉक्टर बनने की अपनी ख्वाहिश जाहिर की थी। कोई दिक्कत होने पर वह हमेशा ऐसे ही रिएक्ट करती थी। उस दिन संयोग से जीबी रोड चौकी इंचार्ज किरण शेट्ठी से उसकी मुलाकात हो गई। शबनम ने अपनी सारी कहानी उनसे बयां कर दी। इसके बाद शुरू हुआ, शबनम की बेटी की किस्मत बदलने का सिलसिला। बात आगे जिला के आला अधिकारियों तक पहुंची। लड़की को वहां से हटाकर चिल्ड्रन होम ले जाया गया जहां उसका एक प्राइवेट स्कूल में दाखिला कराया गया। बालिग होने तक अब उसकी शिक्षा-दीक्षा पुलिस के संरक्षण में होगी।

जीबी रोड पर देह व्यापार के धंधे में उतरी शबनम और उसी की तरह दूसरी कई महिलाएं हैं, जो अपने बच्चों को बेहतर माहौल देना चाहती हैं। लेकिन उनका यहां से निकल पाना आसान नहीं है। पहली बार ऐसा हुआ है कि दस साल से जीबी रोड पर रहने वाली एक महिला की बेटी माहौल से बाहर निकली है। इससे दूसरी महिलाओं में भी आशा जगी है। बीते दस दिनों में ही दो अन्य महिलाएं चौकी इंचार्ज को अपनी अर्जी दे चुकी हैं।
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किरण शेट्ठी बताती हैं कि यह सब इतना आसान नहीं था। फिर भी, नेक काम के लिए बढ़े कदम मंजिल पा ही लेते हैं। शबनम और उसकी बेटी की कहानी ने अंदर तक झकझोर दिया। इस बारे में अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चाइल्ड वेलफेयर कमेटी से बात की। सबका उत्साहवर्धक सहयोग मिला और नतीजा सबके सामने है।

शबनम ने बताई अपनी कहानी:
शबनम बताती है कि दस साल पहले उसको इस दलदल में फेंक दिया गया। कई बार यहां से निकलने की कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हो सकी।वह नहीं चाहती थी कि उसकी बेटी इस गंदे माहौल में पले और उसका भविष्य भी तबाह हो जाए। अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर वह सभ्य समाज का हिस्सा बनाना चाहती थी। मैडम ने उनकी पीड़ा समझी और अपने उच्च अधिकारियों से बात की। उन लोगों ने बाल कल्याण विभाग से बात कर उनकी सहमति ली। चिल्ड्रन होम में पांचवीं तक पढ़ाई करने के बाद बच्ची को अगले स्कूल में भेज दिया जाएगा।

पैसे की नहीं होगी कमी
जब स्टाफ ने बच्ची के बारे में बताया तो हम खुद उस बच्ची से मिले। हमने बात की तो बच्ची काफी तेज लगी। वह डॉक्टर बनना चाहती है। उसके सपने को पूरा करने के लिए पहल की गई। इसमें कमला मार्केट थाने के स्टाफ ने पूरा सहयोग दिया। बच्ची के लिए पुलिस वेलफेयर फंड सहित अपने सहयोग से फंड दिया जाएगा, जो उसके बैंक में रखा जाएगा। ऐसा इंतजाम किया जा रहा है, जिससे उसको पैसे की कमी न हो।
-संजय भाटिया, पुलिस उपायुक्त, मध्य जिला

अपने बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिये अन्य मां सामने आयी शबनम की बेटी के सुनहरे भविषंय के लिए पुलिस की ओर से की गयी पहल की सराहना हो रही है। यहां बच्चों के साथ रहने वाली दूसरी महिलाएं अब सामने आकर अपने बच्चों के भविष्य सुधारने के लिए गुहार लगाने लगी है। दो महिलाएं सामने आयी है जो अपने बच्चों को इस माहौल से दूर भेजना चाहती है। इनका मानना है कि कोई भी इंसान इस गंदे महौल में अपने बच्चों को नहीं रखना चाहता है। वह मजबूरी में यहां फंसी हैं, लेकिन वह नहीं चाहेंगी कि वह अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ करें। निजी संस्थाएं बच्चों के लिए पढ़ाई लिखाई की व्यवस्था करती है उनके बच्चे स्कूल भी जाते हैं, लेकिन आखिरकार बच्चों को माहौल गंदा ही मिलता है।

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