चेन्नई जैसी मूसलाधार बारिश हुई तो गाजियाबाद में हालात चेन्नई से कई गुना खतरनाक होंगे। शहर की खराब प्लानिंग और शहर का पानी ढोने वाली एक मात्र हिंडन नदी का गला घोंटकर खड़ी की गईं इमारतें इस तबाही का बड़ा कारण बनेंगी।
सरकारी सिस्टम की लापरवाही से विलुप्त हुए तालाब इस तबाही को और भयावह बना देगी। पानी को रोकने के लिए अब न नदी बची न तालाब।
जानकारों की मानें तो चेन्नई से आधी बारिश भी गाजियाबाद में बरसी तो बंधे बन जाने के बावजूद हिंडन किनारे बसे राजनगर एक्सटेंशन, हिंडन विहार समेत कई कालोनियां डूब जाएंगी और नुकसान का आकलन कर पाना भी मुश्किल होगा।
कभी नवयुग मार्केट तक बहता था हिंडन का पानी
वर्ष 1978 में भारी बारिश की वजह से गाजियाबाद में बाढ़ आई तो हिंडन का पानी पटेल नगर को पार करते हुए पुराने बस अड्डे, नवयुग मार्केट तक पहुंच गया था।
अब सरकारी तंत्र और भूमाफियाओं ने नदी का गला ऐसा घोंटा कि गाजियाबाद में हिंडन सिर्फ 150 से 200 मीटर चौड़ी रह गई।
दोनों किनारों पर पुस्ते बनाकर नदी के रुख को मोड़ दिया गया है। जानकारों की मानें तो 1978 जैसे हालात अब फिर बने तो बंधे और पुस्ते को तोड़ पानी भारी तबाही मचा सकता है।
ये वर्तमान हालात
कनावनीः कनावनी में भूमाफियाओं की वजह से नदी के बहाव से महज 100 फीट की दूरी तक आबादी बस गई है। प्लाटिंग कर धड़ाधड़ अवैध निर्माण किया जा रहा है।
ये हालात तब हैं, जब इस रिहायश के लिए यहां न तो पुस्ता बना है और न ही नदी का बहाव रोकने के लिए कोई और इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में बाढ़ आई तो यहां बने मकानों का नामों निशान नहीं बचेगा।
हिंडन विहारः हिंडन नदी के किनारे जीटी रोड से सटे हिंडन विहार का भी हाल ऐसा ही है। डूब क्षेत्र और सरकारी जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर बसी इस कालोनी की सुरक्षा के लिए अब कच्चा पुस्ता बना दिया गया है।
सामान्य दिनों में भले यह पुस्ता कालोनी को सुरक्षित कर दे, लेकिन 1978 जैसी बाढ़ आई तो महज 10 से 15 फीट ऊंचा यह पुस्ता तोड़कर पानी कालोनी में घुस जाएगा।
खराब प्लानिंग भी मचा देगी तबाही
भारी बारिश हुई तो तबाही सिर्फ हिंडन और तालाबों की वजह से ही नहीं शहर की ड्रेेनेज और सीवर की खराब प्लानिंग की वजह से भी मचेगी।
शहर में जलभराव का कारण ही सीवर और ड्रेनेज का सिस्टम ठीक नहीं होना है। निकासी बंद है। बारिश और सीवर का पानी निकल ही नहीं पाता और जलभराव की दिक्कत सामने आती है।
कालोनियों में खप गए 138 तालाब
नगर निगम क्षेत्र में 138 तालाब धीरे-धीरे गुम हो गए। इन तालाबों पर निजी लोगों ने कब्जे किए तो सरकारी विभाग भी तालाबों को पाटने में पीछे नहीं रहेगी।
जीडीए की आवासीय कालोनियों में 18, यूपीएसआईडीसी के औद्योगिक क्षेत्र में 13, आवास विकास परिषद की कालोनियों में 6 और सीपीडब्ल्यूडी व नगर निगम ने एक-एक तालाब को कब्जा कर उस पर निर्माण कर दिया है।
साहिबाबाद निवासी सुशील राघव की याचिका पर एनजीटी इन तालाबों को खाली कराने के आदेश जारी कर चुकी है।
कोआर्डिनेटर, कंफेडरेशन के कोआर्डिनेट कुलदीप सक्सेना ने बताया कि टाउन प्लानिंग में खामी तो है ही, उसके बाद होने वाली दिक्कतें अलग हैं।
बिल्डर्स ने नियमों ताक पर रखकर निर्माण किया है, नाले ढंक दिए गए हैं। बारिश के पानी की निकासी के लिए स्लोप दिया ही नहीं गया, नतीजा पानी ठहरा रहता है।
कंसोर्टियम ऑफ गाजियाबाद के अध्यक्ष के शरत झा ने बताया कि जब निकासी ही नहीं होगी तो जलभराव होना निश्चित है।
हर बारिश में यही हाल होता है। अवैध निर्माण से इंफ्रास्ट्रक्चर की बिगड़ी हालत ही जलभराव के लिए जिम्मेदार है।