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स्मार्ट सिटी की हर चीज होगी स्मार्ट

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भारतीय अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रदर्शनी में आईटीपीओ ने स्मार्ट सिटी का खाका पेश किया है। इसमें तकनीकी मदद एक्सवीडिया टेक कंपनी ने की है। स्मार्ट सिटी में हर चीज स्मार्ट होगी।
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शहर में इको-फ्रेंडली इमारतें होंगी। सड़कों पर वाहन फर्राटा भरेंगे। सुरक्षा भी चाक चौबंद होगी। शहर अवैध निर्माण और अतिक्रमण से मुक्त होगा। चार दिवसीय प्रदर्शनी बृहस्पतिवार से प्रगति मैदान में शुरू हुई।

आयोजकों के मुताबिक, स्मार्ट सिटी का मतलब ऐसे शहर से है, जो अपने निवासियों को पूरी सहूलियत और सुविधा देने में कामयाब रहे। इसका मानक वहां रहने वाले लोगों की जरूरतों पर तय होता है। इसमें सबसे अहम भूमिका सेंट्रल सिटी डेटा सेंटर की होती है। इसके लिए सबसे बेहतर क्लाउड सेटअप होता है।
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तीन फेज में तैयार होगा स्मार्ट शहर

कई कंपनियों को ऑनलाइन निगरानी की सुविधा दे रहे एक्सवीडिया टेक के वाइस प्रेसीडेंट एके सिन्हा ने बताया कि स्मार्ट शहर तीन फेज में तैयार हो जाएगा। जैसे, अगर गाजियाबाद को स्मार्ट बनाना है तो पहला फेज एक महीने का होगा। इसमें पूरे शहर की मैपिंग की जाएगी।

इसके बाद उपकरणों को लगाने में एक साल का समय लग सकता है। आखिरी फेज मॉनिरिटरिंग और चेतावनी जारी करने का होगा। तीन से छह महीने में इसका असर दिखने लगेगा। इसका बजट शहर के आकार, आबादी व उसकी जरूरतों के हिसाब से तय होगा।

अपराधियों की होगी पहचान
इसका बेहतर तरीका फेस आईडेंटिफिकेशन सिस्टम होगा। इसमें पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज अपराधियों और संदिग्ध लोगों की तस्वीर और दूसरे रिकॉर्ड कंप्यूटर में फीड रहेगा। पूरा सिस्टम ऑनलाइन होगा। सिस्टम की जद में आते ही उसकी मौजूदगी की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम को मिल जाएगी। इतना ही नहीं, नए अपराधियों उसकी हरकतों और साथ में ले जा रहे सामान के आधार संदिग्धता तय होगी। मसलन, सिस्टम यह सूचना भी देगा कि वह अपने साथ किस तरह का सामान लेकर कहां मौजूद है।
(फोटो: सोशल मीडिया)
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ये होंगी खास सुविधाएं

सभी रास्तों की ऑनलाइन मैपिंग होने से ट्रैफिक पुलिस को किसी सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ने से पहले अलर्ट मिल जाएगा। इससे ट्रैफिक डायवर्ट किया जा सकेगा। इसी डाटा से ट्रैफिक सिग्नल की हरी-लाल बत्ती का समय भी तय होगा। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले लोगों पर भी नकेल कसी जाएगी।

सड़क दुर्घटना पर मिलेगी तुरंत मदद
सड़क दुघर्टना होते ही इसकी जानकारी संबंधित एजेंसियों को मिल जाएगी। इससे पीड़ितों को चंद मिनटों में इलाज मिलेगा। खास बात यह कि इस तरह का डाटा होने से सरकार सार्वजनिक परिवहन की बेहतर योजना बना सकेगी। साथ ही जीपीएस युक्त वाहन ऑनलाइन निगरानी में रहेंगे।

बिजली की बचत होगी
स्मार्ट सिटी में सार्वजनिक स्थलों पर ऑटोमैटिक लाइट होगी। संबंधित जगह की रोशनी के आधार पर यह ऑन-आफ या डिम होती रहेगी। इससे बेवजह लाइट नहीं जलेगी। साथ ही उस जगह के रोजाना के मौसम के बदलावों पर भी नजर रखी जाएगी। वहीं ऑनलाइन मॉनिटरिंग होने से शहरी नियोजन बेहतर होगा। इससे अवैध निर्माण, अतिक्रमण आदि से जुड़ी जानकारी संबंधित एजेंसियों को तत्काल मिलेगी।
(फोटो: सोशल मीडिया)
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