एम्स के शोध में खुलासा, संक्रमण की प्रक्रिया समझने और इलाज के नए रास्ते तलाशने में मिलेगी मदद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एम्स नई दिल्ली के वैज्ञानिकों ने डेंगू वायरस के शरीर में बढ़ने के तरीके पर एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है। इस शोध में सामने आया है कि शरीर में मौजूद छोटे राइबोन्यूक्लिक एसिड (आरएनए) अंश वायरस की वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। ये अंश वायरस को बढ़ने में मदद भी कर सकते हैं और कुछ स्थितियों में उसकी वृद्धि को रोक भी सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने डेंगू वायरस से संक्रमित कोशिकाओं में बनने वाले छोटे आरएनए अंशों का अध्ययन किया। आरएनए शरीर में कई जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। अध्ययन के अनुसार, डेंगू संक्रमण के दौरान ट्रांसफर आरएनए (टी-आरएनए) के टूटने से टीआरएनए-डिराइव्ड फ्रैगमेंट्स (टीआरएफ्स) नामक अंश बनते हैं।
वैज्ञानिकों ने आरएनए अनुक्रमण और नॉर्दर्न ब्लॉटिंग तकनीकों से इन अंशों की पहचान व पुष्टि की। विशेष एंटी-सेंस ओलिगोन्यूक्लियोटाइड्स (एएसओ) का उपयोग कर चुनिंदा आरएनए अंशों की गतिविधि रोकी गई। इससे डेंगू वायरस की वृद्धि पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण हुआ। डॉ. भूपेंद्र वर्मा ने बताया कि ये अंश वायरस की प्रतिकृति को बढ़ावा या रोक सकते हैं। इस प्रक्रिया में पीआईथ्रीके नामक एक महत्वपूर्ण कोशिका संकेत मार्ग भी भूमिका निभाता है। यह मार्ग कोशिकाओं की वृद्धि और अन्य जैविक गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
वायरस वृद्धि में दोहरी भूमिका
एम्स के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. भूपेंद्र वर्मा ने बताया कि अध्ययन में छोटे आरएनए अंशों की दोहरी भूमिका सामने आई है। कुछ अंश डेंगू वायरस की प्रतिकृति को बढ़ावा देते हैं, जबकि कुछ इसे रोकने में मदद करते हैं। इस प्रक्रिया में पीआईथ्रीके नामक एक महत्वपूर्ण कोशिका संकेत मार्ग भी शामिल है। आरएनए के इन अंशों के जरिये मार्ग में होने वाले बदलाव वायरस के व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
नए उपचारों की उम्मीद
शोधकर्ता दीक्षा मधरी के अनुसार, यह अध्ययन डेंगू वायरस और मानव कोशिकाओं की जटिल प्रक्रियाओं को समझने में सहायक है। शोध के निष्कर्ष भविष्य में ऐसे उपचार विकसित करने के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जो आरएनए अंशों को लक्ष्य बनाएं। यह शुरुआती वैज्ञानिक निष्कर्ष है, आगे शोध की आवश्यकता होगी।