इसके बावजूद, यह परिचर्चा शाम को स्कूल ऑफ सोशल साइंसेंज के बाहर आयोजित की गई। उमर खालिद की पुस्तक का नाम 'फ्रैक्चरड कम्युनिटीजः आदिवासी हिस्ट्री एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' है। जेएनयू में 'उमर खालिद को रिहा करो' के नारे पहले भी लगते रहे हैं।
जेएनयू छात्र संघ सार्वजनिक तौर पर उमर खालिद की रिहाई की कई बार मांग कर चुका है। एबीवीपी की ओर से 'छात्र संघ की कब्र खुदेगी' जैसे नारे लगाए गए। यह घटना विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों के बीच चल रहे वैचारिक मतभेदों को दर्शाती है। प्रशासन की अनुमति रद्द करने के बावजूद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इससे परिसर में माहौल गरमा गया।