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Delhi NCR News: नाश्ता छोड़ना पड़ सकता है भारी... अवसाद और चिंता का बढ़ता खतरा

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- चार लाख लोगों पर हुए अध्ययन में खुलासा, किशोरों और युवाओं पर सबसे ज्यादा असर
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सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। सुबह का नाश्ता छोड़ना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। न्यूट्रिशनल न्यूरोसाइंस जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, जो लोग नियमित रूप से नाश्ता नहीं करते, उनमें अवसाद, चिंता और तनाव का जोखिम अधिक पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह का भोजन दिमाग को ऊर्जा देने का सबसे अहम स्रोत होता है।
यह अध्ययन बड़े स्तर पर किया गया, जिसमें करीब चार लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण शामिल है। विभिन्न शोधों को मिलाकर किए गए इस निष्कर्ष में स्पष्ट हुआ कि नाश्ता छोड़ने से शरीर में ऊर्जा की कमी होती है, जिसका सीधा असर दिमाग की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि किशोरों और युवाओं में नाश्ता छोड़ने की आदत तेजी से बढ़ रही है। इसका असर उनकी मानसिक स्थिति पर अधिक गंभीर रूप से देखने को मिल रहा है। ऐसे युवाओं में चिड़चिड़ापन, चिंता और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं ज्यादा देखी गईं। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र अक्सर समय की कमी के कारण नाश्ता छोड़ देते हैं।
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डॉक्टरों ने कहा नाश्ता है जरूरी
मानव व्यवहार एवं संबद्ध संस्थान के वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि संतुलित नाश्ता मानसिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नाश्ता छोड़ने से ब्लड शुगर स्तर प्रभावित होता है, जिससे मूड स्विंग और तनाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या इस समस्या की बड़ी वजह है। ऐसे में नियमित और पौष्टिक नाश्ता मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
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