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राजधानी में महफूज नहीं नारी, रोजाना छह दुष्कर्म और नौ से छेड़छाड़, अफसरों के दावे फेल

Fri, 02 Aug 2019 06:23 PM IST
शाहरुख खान राजीव कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फाइल फोटो
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भले ही अफसरशाही महिला सुरक्षा के तमाम दावे करती हो, लेकिन हकीकत कोसों दूर है। दिल्ली में प्रतिदिन छह महिलाएं दुष्कर्म का शिकार होती हैं और करीब नौ से छेड़छाड़ की जाती है। यह तो वह आंकड़े हैं जिनमें शिकायत दर्ज कराई गई। स्याह सच यह भी है कि ज्यादातर महिलाएं लोकलाज के कारण शिकायत करने थाने तक नहीं जाती हैं।
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राजधानी में दुष्कर्म और छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं पर दिल्ली पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस की ओर से रोकथाम के लिए उठाए गए कदम से महिलाओं में जागरूकता आई है। महिलाएं पहले शोषण होने के बावजूद शिकायत नहीं करती थी। वह अब थाने पहुंचकर या अन्य माध्यमों के जरिये इसकी शिकायत कर रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 90 फीसदी से ज्यादा मामलों में पीड़िता के जानकार ही उनकी आबरू के साथ खिलवाड़ करते हैं। सिर्फ चार फीसदी से भी कम मामलों में अनजान शख्स महिलाओं के साथ दुष्कर्म के मामलों में शामिल पाए गए हैं। 
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वारदात दर्ज करने के बाद पुलिस ने करीब 80 फीसदी मामले को सुलझा लिया है। छेड़छाड़ के मामलों पर कार्रवाई करने में पुलिस पीछे नहीं है।

 वर्ष            दुष्कर्म
2019            1176
2018            1185
2017            2146
2016            2155
2015            2199
2014            2166
2013            1636


वर्ष            छेड़छाड़
2019            1589
2018            1780
2017            3422
2016            4165
2015            5367
2014            4322
2013            3515
नोट : 2018-19 में दुष्कर्म और छेड़छाड़ के आंकड़े 15 जुलाई तक के ही हैं।
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पुलिस द्वारा उठाए गए कुछ कदम

-दिल्ली पुलिस ने अपने सभी थानों में 24 घंटों सातों दिन महिला हेल्प डेस्क खोली थी। महिला हेल्पडेस्क पर अलग से फोन नंबर लगाए गए।
-सीमा विवाद का खत्म कर अब दुष्कर्म या छेड़छाड़ पीड़िता दिल्ली के किसी भी थाने में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती हैै।
-महिलाओं की शिकायत को सिर्फ महिला अधिकारी ही सुनती हैं।
-एक स्पेशल सीपी को नोडल अफसर नियुक्त कर महिलाओं के लिए काम कर रही एनजीओ के साथ बैठक करने का दिया गया आदेश।
-छेड़छाड़ की घटनाओं को देखते हुए स्कूलों और गर्ल्स कॉलेज के बाहर पीसीआर वैन और बीट कांस्टेबलों की तैनाती की गई।
-हिम्मत ऐप शुरू की गई और इसके जरिये महिलाएं कभी भी मदद मांग सकती हैं।
-दिल्ली पुलिस ने राजधानी में अंधेरे वाले स्थानों की पहचान कर प्रशासन से वहां लाइट की व्यवस्था करवाई और वहां गश्त बढ़ाई गई है।
-दिल्ली पुलिस ने महिलाओं की मदद के लिए ऑल वूमेन पीसीआर शुरू की। फिलहाल राजधानी में अलग-अलग जगहों पर 10 महिला पीसीआर वैनों को तैनात किया गया।
 
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