संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने बैंक को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने के धोखाधड़ी समेत अन्य आरोपों से छह अभियुक्त को बरी किया है। अदालत ने बलजीत सिंह, गुलशन चड्ढा, गुरचरण चड्ढा, अशोक चड्ढा, रोहित चड्ढा और सुशील चड्ढा को आईपीसी की धारा 409 (लोक सेवक, बैंकर, व्यापारी या एजेंट द्वारा आपराधिक विश्वासघात) 420 (धोखाधड़ी और बेइमानी से संपत्ति हड़पना), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत व अन्य की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेजों या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में उपयोग करना), 477A (खातों का मिथ्याकरण) और 120बी (आपराधिक साजिश) के आरोपों से बरी कर दिया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी सुखजीत सिंह ने कहा कि अभियोजन पक्ष अभियुक्तों के विरुद्ध अपना मामला किसी भी उचित संदेह से परे साबित करने में विफल रहा है। वहीं, अभियोजन पक्ष के मुताबिक अगस्त, 1999 से जनवरी 2002 तक अभियुक्त बलजीत सिंह सर्वप्रिय विहार का शाखा प्रभारी का वरिष्ठ प्रबंधक था। आरोप है कि अभियुक्त बलजीत सिंह ने निर्दिष्ट प्रणाली का उल्लंघन करके बैंक को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से धोखाधड़ी और छल के कई कार्य किए। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान, उसने कुछ फर्जी खाते खोलकर उनमें विभिन्न लेनदेन करके कई जालसाजी की। साथ ही पांच अभियुक्त के साथ मिलकर जालसाजी कर विभिन्न कार और ट्रक ऋण स्वीकृत किए।