पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने पर पूरी तरह शिकंजा नहीं कस पाने का असर इस बार भी वायु गुणवत्ता पर दिखने लगा है। राष्ट्रीय राजधानी में तो वायु प्रदूषण में बढ़ोत्तरी दर्ज की ही गई, लेकिन पंजाब और हरियाणा के शहर भी इससे अछूते नहीं रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 15 अक्तूबर के बाद हालात और ज्यादा खराब होंगे, क्योंकि इस दौरान ही पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं। हालांकि पंजाब के अधिकारियों का कहना है कि पराली जलाने पर नियंत्रण किया जा रहा है और इसका कुल आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले कम रहेगा।
पराली जलाने के कारण बिगड़ी आबोहवा का असर दिल्ली के साथ ही एनसीआर के अन्य जिलों में भी दिखाई दिया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक, दिल्ली में जहां ओवरऑल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शनिवार के 222 से बढ़कर शाम 4.30 बजे तक 268 और रात 10 बजे 301 पर पहुंच गया, जिसे बहुत खराब की श्रेणी में माना जाता है।
वहीं शाम 4.30 बजे तक गाजियाबाद में 320, फरीदाबाद में 290, नोएडा में 310, ग्रेटर नोएडा में 312, बागपत 259 और मुरथल में एक्यूआई का स्तर 245 रहा। शाम के वक्त प्रदूषण में और भी बढ़ोतरी का असर दिखने लगा। दिल्ली में आनंद विहार में 327, वजीरपुर में 323, विवेक विहार में 317, मुंडका में 309, बवाना में 302 और जहांगीरपुरी में एक्यूआई 300 पर दर्ज किया गया।
केंद्र सरकार के सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकॉस्टिंग एंड रिसर्च के वैज्ञानिकों ने भी पिछले कुछ दिन में पराली जलने की घटनाओं में बढ़ोतरी होने और इससे दिल्ली की आबोहवा प्रभावित होने की रिपोर्ट दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा की दिशा में परिवर्तन और रफ्तार कम होने की वजह से प्रदूषक तत्वों का ज्यादा असर फिलहाल पड़ोसी राज्यों में ही ज्यादा दिखा है। इसका अंदाजा रविवार को शाम 4.30 बजे तक करनाल के अलीपुर खालसा में एक्यूआई 351 पर और पानीपत में 339 पर दर्ज किए जाने से लगाया जा सकता है।
विशेषज्ञों का अंदाजा है कि पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं का असर अगले तीन-चार दिन में राष्ट्रीय राजधानी में भी दिखेगा तथा हवा और जहरीली हो जाएगी। केंद्र सरकार के सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का भी कहना है कि पराली जलाने की वजह से दिल्ली में 15 अक्तूबर तक करीब छह फीसदी तक प्रदूषण बढ़ सकता है, जबकि शनिवार को यह दो फीसदी था।