पिछले एक सप्ताह से दिल्ली शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी अपने दफ्तरों में दिखाई नहीं दे रहे हैं। यही नहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया भी पिछले तीन दिनों से दिल्ली में नहीं है। असल में वे सभी छत्तीसगढ़ गए हुए हैं।
दरअसल, दिल्ली प्रदेश सरकार के निर्देश पर दिल्ली शिक्षा विभाग व उच्च शिक्षा विभाग के करीब 40 शीर्ष शिक्षा अधिकारी छत्तीसगढ़ में 'मूल्य आधारित अध्यापन के नये तरीके' सीख रहे हैं। 'दि इंडियन एक्सप्रेस' में प्रकाशित खबर के मुताबिक एक अप्रैल से आठ अप्रैल के बीच छत्तीसगढ़ के दुर्ग में 'मध्यस्थ दर्शन जीवन विद्या' कोर्स चलाया जा रहा है। इसे मानवीय शिक्षा शोध संस्थान ने आयोजित किया जा रहा है।
संस्था के मुताबिक मनीष सिसोदिया उन्हीं दिनों से उनके साथ जुड़े हुए हैं, जब वे सामान्य सामाजिक कार्यकर्ता हुआ करते थे। हालांकि मनीष सिसोदिया इस मामले पर प्रतिक्रिया के लिए उपलब्ध नहीं हो पाए। लेकिन उनके मीडिया सलाहकार अरुणोदय प्रकाश ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इस दिल्ली सरकार का मकसद दिल्ली के स्कूली छात्रों को बेहतर नागरिक बनाना है। वर्कशॉप के आयोजक योगेश शास्त्री के मुताबिक, सामाजिक कार्य के दौरान मनीष सिसोदिया 'मध्यस्थ दर्शन' से बतौर शिक्षक जुड़े हुए थे।
क्या है मध्यस्थ दर्शन जीवन विद्या
'मध्यस्थ दर्शन जीवन विद्या' छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 30 किमी दूर अहिवारा रोड पर अछोटी गांव में स्थित अभ्युदय आश्रम में आयोजित होने वाली वर्कशाप का एक कोर्स है। इस आश्रम की स्थापना वर्तमान भागमभाग में उलझी जिंदगी में मानवता, आध्यात्मिकता और आत्मज्ञान को जानने की चेष्टा जगाने के लिए की गई है। वर्कशाप आयोजित करने वाले योगेश शास्त्री ने बताया कि जीवन विद्या की मूल भावना भौतिकवाद को सुख, शांति और जीवन का पर्याय नहीं बनने देना है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में रोज सैकड़ों लोग आते हैं। यही नहीं, उन्होंने बताया कि यहां आने वालों पर यहां से जाने का दबाव नहीं बनाया जाता है। साथ ही फीस भी नहीं ली जाती। हालांकि अपना खर्च खुद वहन करना होता है। कुछ साल पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी इस आश्रम में आकर रह चुके हैं। कोर्स की तारीफ पूर्व राष्ट्रपति डॉ कलाम भी कर चुके हैं।
दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाया जाएगा छत्तीसगढ़ का कोर्स
शास्त्री के मुताबिक अब तक इस संस्थान से करीब 30 हजार से अधिक लोग ट्रेनिंग ले चुके हैं। रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, एनआईटी रायपुर समेत देशभर की 10 विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों में शामिल है। अब यह दिल्ली के स्कूलों में भी इसे लागू किया जाएगा।
इसकी शुरुआत करीब 12 साल पहले अमरकंटक के बाबा नागराज से जीवन चेतना मूल्य की शिक्षा लेकर 12 लोगों ने इसकी स्थापना की। वे लोग संसार में बढ़ रही भौतिकवाद से परेशान थे। इनमें से कोई दिल्ली से आईटी कंपनी छोड़कर तो कोई फैमिली बिजनेस से अलग हो समाज के लिए कुछ करना चाहता था।