दिल्ली की अलग-अलग अदालतों से आए तीन फैसलों ने आम आदमी पार्टी की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार से लड़ाई में संजीवनी दी है।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के दफ्तर पर सीबीआई की रेड, दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की तरफ से दिल्ली पुलिस कर्मी की भर्ती में दिलचस्पी नहीं लेने और एमसीडी से बुजुर्ग पेंशन हटाकर दिल्ली सरकार को सौंपने के फैसले को लेकर आप सरकार ने भाजपा और केंद्र पर हमला बोला है। तीनों ही मामले आप सरकार पहले से उठाती रही है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया है कि दिल्ली सरकार के प्रधान सचिव कार्यालय पर छापेमारी मामले मे जब्त कुछ फाइलें सरकार को वापस कर दें।
राजनीति से प्रेरित थी सीबीआई रेड
सिसोदिया ने कहा, हम बार बार कह रहे थे कि सीबीआई की रेड राजनीति से प्रेरित है। राजेंद्र कुमार का नाम लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय पर छापा मारा गया। कोर्ट के आदेश यह बात साबित हो गई।
सीबीआई कोर्ट में बिल्कुल साबित नहीं कर पायी कि 2007 से 2013 के जिस मामले की जांच के लिए छापा मारने गए थे, उनका 2015 की फाइल व कागजात से क्या लेना देना है, जब्त क्यों किए?
ये गैर जिम्मेदाराना रवैया है। यहां तक की सीबीआई ने कोर्ट में माना है कि तथाकथित घोटाले से इन कागजात का कोई लेना देना नहीं है।
'क्या माफी मांगेंगे पीएम?'
मनीष सिसोदिया ने कहा कि सीबीआई प्रधानमंत्री के आधीन काम करती है। क्या वो देश से माफी मांगेंगे? हम यह भी मांग कर रहे हैं कि जो अधिकारी राजनीति से प्रेरित होकर छापा मारने आए थे, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने दिल्ली उच्च न्यायालय की तरफ से दिल्ली में महिला सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से दिलचस्पी नहीं लिए जाने की टिप्पणी पर कहा है कि दिल्ली पुलिस चलाना केंद्र सरकार के बस की बात नहीं है।
वहीं केजरीवाल ने राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर पड़े सीबीआई रेड के बारे में देश को बताने के लिए कहा है कि आखिर वहां छापे क्यों पड़े?