जिले में स्टैंडर्ड ऑप्रेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) की शुरुआत उत्तरी गुरुग्राम के उपमंडल अधिकारी के कार्यालय में उपायुक्त हरदीप सिंह ने किया। एसडीएम कार्यालय के निकट स्थित ई-दिशा केन्द्र में एसओपी लागू करने के लिए फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किया गया। इस मौके पर मौजूद मुख्यमंत्री के सुशासन सहयोगी रेखा यादव ने उपायुक्त को एसओपी के बारे में बताया। ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) में दलालों की भूमिका खत्म करने और खुद फाइल तैयार करने के लिए प्रशासन ने यह व्यवस्था की है।
एसओपी के तहत अब व्यक्ति ना केवल घर बैठे ड्राईविंग लाइसेंस का फार्म भरने में सक्षम होगा, बल्कि उसे कंप्यूटर पर लिए जाने वाले टेस्ट के लिए भी अप्वाइंटमेंट लेने की सुविधा मिलेगी। पहले ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदक को एसडीएम कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ते थे।
अब डीएल के लिए प्रदेश सरकार द्वारा मेडिकल टेस्ट करवाने की अनिवार्यता खत्म कर दी है। इस प्रणाली के लागू होने से अब गुरुग्राम में डीएल बनवाने वाले लोगों को पहले की अपेक्षा 200 रुपये कम भरने पड़ेंगे। पहले 100 रुपये एमसी टैक्स तथा 100 रुपये मेडिकल टेस्ट के लिए भरवाए जाते थे, जो अब नहीं लिए जाएंगे।
अब ड्राईविंग लाइसेंस बनवाने के इच्छुक व्यक्ति को 50 रुपये में मिलने वाला फाइल कवर 10 रूपये में दिया जाएगा। डीएल के लिए फीस अदायगी अब सिंगल विंडो सिस्टम से होगी, ताकि आवेदक को इधर-उधर भटकना ना पड़े। फैसिलिटेशन सेंटर पर तैनात कर्मचारी आवेदक की डीएल का फार्म भरवाने में पूरी मदद करेगा।
उपायुक्त ने बताया कि एसओपी सॉफ्टवेयर के तहत डीएल बनवाने के लिए ‘परिवहन वेबसाइट’ पर जाकर सीधे आवेदन कर सकता है और फीस अदा करने के साथ साथ स्टॉल टेस्ट के लिए स्लॉट बुक कर सकता है। स्टॉल टेस्ट एक कंप्यूटरीकृत टेस्ट होता है जो लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदक के लिए ही अनिवार्य है। स्थाई ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाले आवेदक को स्टॉल टेस्ट देने की जरूरत नहीं है।