एसआईटी की अर्जी पर जिरह करते हुए बचाव पक्ष ने कहा इस मामले में एसआईटी के पास कोई साक्ष्य नहीं है। यह मामला 34 साल पुराना है। पहली बार शिकायतकर्ता हरविंदर सिंह ने 2016 में सज्जन कुमार का नाम लिया।
उसके बाद मुवक्किल कई बार जांच में शामिल हो चुके हैं तो अब पॉलीग्राफ कराने का औचित्य है। अगर पॉलीग्राफ में एजेंसी को कोई साक्ष्य नहीं मिला तो इसके लिये परेशान करने के लिये कौन जवाबदार होगा।
गौरतलब है कि यह मामला जनकपुरी इलाके में सोहन सिंह व उसके दामाद अवतार सिंह की हत्या व विकास पुरी इलाके में गुरुचरन सिंह को जलाने से जुड़ा है। गुरुचरण की लंबी बीमारी के बाद तीन साल पहले मौत हो चुकी है।
इस बाबत पुलिस ने थाना विकासपुरी व जनकपुरी मे दो एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में निचली अदालत ने 21 दिसंबर 2016 को सज्जन कुमार को अग्रिम जमानत दे दी थी। एसआईटी ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने भी 22 फरवरी 2018 को अग्रिम जमानत रद्द करने से इंकार कर दिया।