गुड़गांव के सिख दंगा पीड़ितों ने पांच लाख मुआवजे के ऐलान का स्वागत करने के साथ-साथ इसे नाकाफी भी बताया है। उन्होंने एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की है।
गुरद्वारा सिंह सभा के अध्यक्ष संतोख सिंह साहनी ने कहा कि मोदी सरकार ने सिखों के दर्द को दर्द समझा है। इसके लिए वह बधाई के योग्य हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1984 में दंगा पीड़ितों को मात्र 10 हजार रुपये की राशि दी गई थी।
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वहीं मनमोहन सिंह सरकार में 90 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया। अब केंद्र सरकार ने इसे पांच लाख किया है। मगर यह जान-माल के नुकसान के अनुसार काफी कम है। उन्होंने सभी दंगा पीड़ितों की ओर से मुआवजे की राशि एक करोड़ रुपये करने की अपील की।
बता दें कि वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगे में गुड़गांव के 47 मासूम लोग मारे गए थे। जैकमपुरा, बादशाहपुर और पटौदी में सिखों को जानमाल का भारी नुकसान हुआ था। वहीं तीन सौ दुकान, मकान और उद्योग जला दिए गए थे।
संतोख सिंह साहनी खुद दंगा पीड़ित हैं। इनके परिवार को उस दौरान जान-माल का नुकसान हुआ था। इसके चार उद्योग जलकर खाक हो गए थे। इनकी मांग है कि जिनके उद्योगों को नुकसान हुआ है, उन्हें 500 गज का प्लॉट दिया जाए।