सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी से कथित मारपीट के बाद एक बार फिर भाजपा की एकजुटता की पोल खुल गई। प्रदेश स्तर के नेताओं ने मात्र बयानबाजी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली।
उनके साथ एक भी बड़ा नेता कंधे से कंधा मिला कर खड़ा नजर नहीं आ रहा। भाजपा में पहले से ही सभी नेता अपनी-अपनी ढ़फली बजा रहे हैं। इस मुद्दे पर मनोज तिवारी पूरी पार्टी में अकेले पड़ गए।
तिवारी के अध्यक्ष बनने के बाद से ही प्रदेश स्तर के नेता एक-दो मौकों को छोड़कर मंच साझा करने से बचते रहे हैं। सीलिंग, आप सरकार को घेरने के मुद्दे सहित अन्य मसलों पर भी सभी नेताओं ने अलग ही मोर्चा खोला हुआ है।
केंद्रीय मंत्री विजय गोयल, विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता, भाजपा के अन्य तीन विधायक के अलावा अन्य प्रदेश स्तर के नेता अपने स्तर पर राजनीति कर रहे हैं। वे प्रदेश कार्यालय में नजर तक नहीं आते। पूर्वांचलियों के मामले में भी भाजपा बैकफुट पर आ गई थी। कांग्रेस व आप ने उसे घेरने में कोई कसर नहीं छेड़ी।