सूरजकुंड के अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला की चौपाल पर सिद्धिगोमा डांस की प्रस्तुति देखकर न सिर्फ लोग झूम उठे बल्कि इसके कारनामों व भाव भंगिमा को देखकर दांतों तले उंगली दबा ली।
जब इन आदिवासी कलाकारों ने ड्रम की थाप पर सो बिलाल-सो बिलाल गोमा गोमा सिद्धिगोमा...सिद्धिगोमा की धुन पर नृत्य करना शुरू किया तो लोग देखते रह गए।
लगभग सात सौ साल पुरानी सभ्यता से गुजरात का यह आदिवासी सिद्धिगोमा ऐसा ही नृत्य है जिसकी प्रस्तुति शुरू होते ही लोग झूमना शुरू कर देते हैं।
जब नृत्य खत्म होने को हुआ तो लोगों की सांसे थम सी गईं। अंत में इसके दो कलाकारों ने नारियल ऊपर फेंका और फिर सिर पर गिराकर उसे फोड़ दिया। सिर से नारियल फोड़ने की कला देखकर लोग दंग रह गए।
इस नृत्य के ग्रुप लीडर हैदर सिद्धि ने बताया कि सिद्धिगोमा जाति करीब सात सौ साल पहले दक्षिण अफ्रीका से समुद्री जहाजों द्वारा यहां आई थी और फिर यहीं की मिट्टी में रच बस गई। लेकिन उन्होंने अपनी परंपराएं नहीं छोड़ीं।
गुजरात के भरुच जिले में रहने वाले ये लोग अपने आराध्य हजरत बाबा गौर के उर्स के मौके पर हर साल सिद्धिगोमा नृत्य करते हैं। इस ग्रुप में अकबर, सरफरार, इम्तियाज, शकील, इब्राहीम, मोहसिन एवं वसीम सहित 15 कलाकार हैं।