कभी वाटर स्पोर्ट्स के लिए मशहूर भलस्वा लेक फिलहाल अपने वजूद के लिए संघर्ष कर रही है। हालात जल्द नहीं बदले तो 34 वर्ग हेक्टेयर में मौजूद इस झील के अस्तित्व पर खतरा मंडरा जाएगा।
यहां बोटिंग के लिए पहुंचने वाले सैलानियों के साथ वाटर स्पोर्ट्स की प्रैक्टिस करने वाले और सैर करने वाले लोग भी झील की तरह बीमार हो जाएंगे। हैरत की बात यह है कि लेक में भलस्वा डेयरी से निकलने वाला गंदा पानी भी सीवर लाइन के जरिये प्रदूषण का जहर घोल रहा है।
प्रदूषण और बदबू की वजह से डेढ़ साल तक इस झील पर बोटिंग बंद कर दी गई थी, लेकिन अब दोबारा शुरू कर दिया गया है।
चौंकाने वाली बात यह है कि लेक में प्रतिदिन हजारों लीटर गंदा पानी, गोबर और प्लास्टिक पहुंच रहा है। लेक से महज चंद कदम की दूरी पर भलस्वा डेयरी भी है, जबकि रास्ते का गंदा पानी भी सीवर के जरिए इसी झील में पहुंच रहा है।
इसकी वजह से बोटिंग या आसपास की सड़क पर सैर करने वालों को दुर्गंध से जूझना पड़ता है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लेक में कार्यरत कर्मी भी अधिक देर तक वहां खड़े नहीं रह सकते हैं।
लेक के इंचार्ज एनएल मीणा ने बताया कि हाल ही में एक ऑयल कंपनी ने सीएसआर गतिविधि के तहत झील की सफाई की, लेकिन झील में मिलने वाले सीवर के पानी पर अंकुश कौन लगाएगा? इस बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए पीडब्ल्यूडी और दिल्ली जल बोर्ड की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने भी माना कि यहां लंबे समय तक ठहरना या पानी के संपर्क में आने वालों को किसी भी तरह की परेशानी होने का खतरा है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। इस समस्या को लोकसभा में सांसद हंसराज हंस भी उठा चुके हैं और इसे दूर करने की कवायद चल रही है।