आम आदमी पार्टी सरकार गठन से 4 दिसंबर तक फाइलों की अच्छी-बुरी कुंडली वीके शुंगलू की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने तैयार करके सीलबंद लिफाफे में उपराज्यपाल को रविवार को सौंप दी है।
माना जा रहा है कि यह रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के लिए कोई अच्छी खबर नहीं लाने वाला। इसी के मद्देनजर आज मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस शुंगलू पर ही उंगली उठा दी है।
उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा है कि पीएमओ और एलजी शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट के जरिए मनीष सिसोदिया को निशाना बनाना चाहते हैं। इनकी योजना मनीष को गिरफ्तार करने की है।
PMO/LG target Manish thro Shunglu. Plan to arrest Manish. Shunglu facing charges of malpractices in DPS. Will PMO save Shunglu in return?
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 28, 2016
उन्होंने शुंगलू पर ही निशाना साधते हुए कहा कि वो डीपीएस मामले में अनियमितताओं में घिरे हुए हैं। क्या पीएमओ इस रिपोर्ट के बदले शुंगलू को बताएगा? उन्होंने आगे लिखा कि डीपीएस में अनियमितताओं को लेकर शुंगलू के खिलाफ शिकायत है, जो एलजी के पास पिछले 18 महीने से लंबित हैं।
Complaints of malpractices by Shunglu in DPS lying pending wid LG for more than 18 months.
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) November 28, 2016
कमेटी ने क्या सिफारिश की है, यह अभी सामने नहीं आया है
केजरीवाल
हालांकि कमेटी ने क्या सिफारिश की है, यह अभी सामने नहीं आया है लेकिन यह तय माना जा रहा है कि उपराज्यपाल की मंजूरी के बिना किए गए फैसलों से जुड़ी तमाम फाइलों में गड़बड़ी सामने आई है। कमेटी सरकार से भेजी गई 400 से अधिक फाइलों की जांच कर रही थी।
कमेटी को ना सिर्फ गड़बड़ी ढूंढने बल्कि जहां गड़बड़ी, उल्लंघन को लेकर दिल्ली सरकार के अधिकारी, सार्वजनिक पदाधिकारियों की भूमिका पर उत्तरदायित्व तय करने, सिविल या आपराधिक मामला बनता है तो उसकी सिफारिश करने की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
इतना ही नहीं अधिकारी या सार्वजनिक पदाधिकारी की तरफ से लिए गए निर्णयों से सरकार को अगर आर्थिक नुकसान हुआ है तो संबंधित के खिलाफ प्रशासनिक, आपराधिक या सिविल कार्रवाई की सिफारिश भी समिति करनी थी।
मनीष सिसोदिया ने LG से कमेटी भंग करके फाइलें वापस भेजने का नोट भेजा था
Arvind Kejriwal
सूत्र बताते हैं कि कमेटी का कार्यकाल 2 दिसंबर तक है। 30 अगस्त को गठित और 14 अक्तूबर को 6 सप्ताह के विस्तार के दौरान दिल्ली सरकार से मंगाए गए एक्सपर्ट अधिकारियों ने नियमों के हिसाब से फाइलों की पड़ताल की है। उसमें तमाम खामियां पाए जाने का जिक्र उपराज्यपाल 14 अक्तूबर को कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली कैबिनेट ने 14 अक्तूबर को उपराज्यपाल की तरफ से गठित शुंगलू कमेटी को असंवैधानिक करार देकर तत्काल भंग करने की सिफारिश भेज चुकी है। इसके बाद 17 अक्तूबर को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल से कमेटी भंग करके दिल्ली सरकार की फाइलें वापस भेजने का नोट भेजा था।
इस पर उपराज्यपाल ने कहा था कि अगर सब कुछ नियमों के हिसाब से किया गया तो सच्चाई सामने आने से सरकार क्यों डर रही है? जो सच्चाई जांच में सामने आएगी, उसे सार्वजनिक करेंगे। समिति फाइलों में सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच कर रही है।