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श्रद्धा वालकर हत्याकांड: गूगल, व्हाट्सऐप और बंबल के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से देंगे गवाही

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-साकेत कोर्ट ने दी अनुमति, 1 दिसंबर से रोजाना एक गवाह का बयान दर्ज करने का निर्देश
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संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली। साकेत कोर्ट ने गूगल, व्हाट्सऐप और बंबल कंपनियों के विदेश में कार्यरत नोडल अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गवाही देने की अनुमति दे दी है। अदालत ने कहा कि इन गवाहों को विदेश से भारत बुलाने में अधिक समय और खर्च लगेगा। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए ऑनलाइन गवाही कराना उचित है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी ने दिल्ली पुलिस की याचिका मंजूर करते हुए यह आदेश दिया। इस मामले में आफताब अमीन पूनावाला पर श्रद्धा वालकर की हत्या का मुकदमा चल रहा है और सुनवाई अंतिम चरण के करीब है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में चार नोडल अधिकारियों को गवाह बनाया है। इनमें व्हाट्सऐप और मेटा के अधिकारी एड्रियन सिल्वेरा, गूगल के अधिकारी शेल्बी स्मिथ, जीमेल की अधिकारी आरती सेठ और बंबल ग्रुप के अधिकारी ल्यूक मित्सी शामिल हैं। इनमें से तीन अधिकारी अमेरिका और एक ब्रिटेन में कार्यरत हैं। पुलिस इन अधिकारियों के माध्यम से संबंधित कंपनियों के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष पेश करना चाहती है। इन गवाहों के बयान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत दर्ज किए जाएंगे।
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साकेत कोर्ट में बनेगा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग केंद्र : अदालत ने निर्देश दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये गवाही के लिए साकेत कोर्ट परिसर स्थित दक्षिण जिला अदालत के एक कक्ष को मुख्य केंद्र बनाया जाएगा। विदेश में मौजूद प्रत्येक गवाह के कार्यालय या निवास के पते के अनुसार नजदीकी भारतीय दूतावास, उच्चायोग या संबंधित वाणिज्य दूतावास में दूसरा केंद्र बनाया जाएगा। संबंधित भारतीय दूतावास या उच्चायोग की ओर से नियुक्त अधिकारी गवाही की प्रक्रिया में समन्वय करेंगे। मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर राम सिंह को भी संपर्क अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सभी जरूरी मंजूरियां और प्रक्रियाएं समय पर पूरी हो सकें।
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1 दिसंबर से दर्ज होंगे बयान : अदालत ने निर्देश दिया है कि गवाहों के बयान 1 दिसंबर 2026 से दर्ज किए जाएंगे। प्रतिदिन एक गवाह का बयान दर्ज करने की योजना है। इसके लिए सरकारी और बचाव पक्ष के वकीलों से बातचीत कर तारीखों का कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि गवाहों को समन गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया के अनुसार भेजे जाएं। समन में गवाही की तारीख, समय, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग केंद्र और पहचान के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाएगी। भारत और संबंधित देशों के बीच समय के अंतर को ध्यान में रखते हुए भी आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।
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