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अस्पतालों के ब्लड बैंकों में रक्त का संकट गहराया, प्लाज्मा तकनीकी के लिए नहीं मिल रहा है खून

Tue, 21 Apr 2020 02:23 AM IST
Vikas Kumar अभिषेक पांचाल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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एम्स में सीआरपीएफ के जवानों ने किया रक्तदान - फोटो : amar ujala
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कोरोना के डर से आम लोग कम रक्तदान कर रहे हैं जिससे ब्लड बैंकों में रक्त का अभाव होने लगा है। राजधानी के अधिकतर सरकारी अस्पताल इस कमी को दूर करने के लिए सामाजिक संस्थाओं और स्वैच्छिक रक्तदाताओं से रक्तदान की अपील कर रहे हैं। ब्लड बैंकों में 60 फीसदी तक रक्त की आपूर्ति रक्तदान शिविरों के माध्यम से होती है, लेकिन कोरोना के कारण काफी दिनों से शिविर नहीं लग पा रहे हैं। इस कारण अस्पतालों में खून की कमी हो रही है। अधिकतर अस्पताल के ब्लड बैंकों में फिलहाल 30 से 40 यूनिट ब्लड ही बचा है जबकि इनकी क्षमता करीब 100 से 200 यूनिट तक होती है। 

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आरएमएल अस्पताल के ब्लड बैंक निदेशक डॉ. किरण चौधरी का कहना है कि लॉकडाउन के कारण अस्पतालों में पहले से तय ऑपरेशन फिलहाल नहीं हो रहे हैं, लेकिन थैलेसीमिया रोगियों के लिए जरूरत पड़ रही है। ऐसे में लोगों को ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करने की आवश्यकता है। रेड क्रॉस सोसाइटी के निदेशक डॉ. वानश्री का कहना है कि रक्त आपूर्ति के लिए लगातार लोगों से रक्तदान की अपील की जा रही है। लॉकडाउन की शुरूआत में शिविर इत्यादि आयोजित नहीं हो रहे थे, लेकिन अब राज्यों व सामाजिक संगठनों के प्रयास जारी हैं। 

सीआरपीएफ जवानों ने किया रक्त दान  
सीआरपीएफ जवानों ने सोमवार को एम्स अस्पताल के ब्लड बैंक लिए स्वैच्छिक रक्तदान किया। एम्स अस्पताल के नर्सिंग अधिकारी कनिष्क यादव ने बताया कि इस शिविर का आयोजन ओखला में किया गया। शिविर के माध्यम से करीब 15 यूनिट ब्लड जमा किया गया। 
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प्लाज्मा तकनीकी के लिए नहीं मिल रहा रक्त

कोरोना वायरस को लेकर प्लाज्मा तकनीक पर दिल्ली सरकार दो बड़े अस्पताल में ट्रायल करने जा रही है लेकिन अभी तक इसके लिए रक्त नहीं मिल रहा है। आईएलबीएस और लोकनायक अस्पताल में प्लाज्मा तकनीक के ट्रायल की पूरी तैयारी कर ली है लेकिन इन्हें फिलहाल कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके व्यक्ति का रक्त नहीं मिल रहा है। 

कोविड संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या दिल्ली में कम है, इसलिए डोनर में दिक्कत आ रही है। दिल्ली में अब तक 431 मरीजों को छुट्टी मिल चुकी है लेकिन इनमें ज्यादात्तर तब्लीगी जमाती शामिल हैं। इनमें से अब तक कोई भी रक्त देने को तैयार नहीं हुआ है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही इनसे रक्त लेने के बाद प्लाज्मा तकनीकी पर काम शुरू होगा।

आईएलबीएस के निदेशक डॉ. एसके सरीन का कहना है कि जो व्यक्ति कोरोना संक्रमित होने के बाद  ठीक हो चुका है और 21 दिन उसके निकल चुके हैं। ऐसे ही व्यक्ति का रक्त लेकर प्लाज्मा तकनीकी पर काम किया जा सकता है।
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