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ई-फार्मेसी के विरोध में दुकानें रही बंद, करोड़ों का हुआ नुकसान

Wed, 14 Oct 2015 06:35 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
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केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित ऑनलाइन दवाओं की खरीद-फरोख्त (ई-फार्मेसी) के विरोध में बुधवार को गुड़गांव में दवा विक्रेता हड़ताल पर रहे।
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ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर जिला गुड़गांव केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की1484 दवा दुकानें और 346 थोक विक्रेताओं ने दवाइयां नहीं बेचीं। जिससे जिले में करीब 70 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

दवाओं के लिए लोग भटकते रहे। जिला प्रधान शरद मेहरोत्रा के नेतृत्व में 160 से अधिक दवा दुकानदारों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर जाकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा भी लिया।
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हालांकि ड्रग विभाग ने जिले के अस्पतालों में चल रहे 60 मेडिकल स्टोर को खुलवाकर रखा। इससे अस्पतालों में भर्ती मरीजों को राहत मिली। कई निजी नर्सिंग होम के आस-पास स्थित मेडिकल स्टोर की दुकानों के ताले तक नहीं खुले।

इस हड़ताल पर स्वास्थ्य विभाग और ड्रग विभाग नजर बनाए हुए थे। अधिकारियों ने एसोसिएशन से संबंधित प्रतिनिधियों को जरूरी दवाओं को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
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फूड ड्रग विभाग के पास पहुंची शिकायत

फूड एंड ड्रग विभाग ने वेबसाइट पर सभी जिले के ड्रग अधिकारियों के नंबर भी डाल दिए थे। फूड ड्रग विभाग के पास भी सुबह-सुबह दवा नहीं मिलने की शिकायत पहुंचने लगी। जिसके बाद दो लोगों को तत्काल दवाई मुहैया करवाने की कोशिश की गई।

कुछ निजी अस्पताल के लोग बड़े अस्पतालों में स्थित दवा दुकान में जाकर दवाइयां खरीदीं। इस दौरान मरीज और उनके परिजनों को घंटों लाइनों में लगना पड़ा।

जिला प्रधान का कहना है कि ई-फार्मेसी से केवल विक्रेताओं को ही नहीं बल्कि मरीजों को भी परेशानी होगी। इसलिए केंद्र सरकार को इस प्रोजेक्ट को वापस लेना चाहिए। इंटरनेट के जरिए दवाओं की बिक्री को नियमित करने के कदम से दवा रिएक्शन का जोखिम बढ़ेगा।

इससे कम गुणवत्ता, गलत ब्रांड और नकली उत्पादों के प्रवेश का रास्ता खुलेगा, जो अर्थव्यवस्था  के लिए बड़ा झटका होगा। ड्रग कंट्रोलर अमनदीप चौहान बताया कि हड़ताल पर रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को सौंप दी है।

किसी भी मरीज को परेशान नहीं होने दिया गया। जिसकी सूचना आई, उसे तुरंत दवा उपलब्ध करा दी गई। अस्पतालों में दवा दुकान खुली रहीं।
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