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चुनाव में कांग्रेस के बहिष्कार का ऐलान

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कर्बला विवाद को लेकर मंगलवार को शिया समुदाय के मार्च को दिल्ली पुलिस ने दिल्ली-यूपी गेट से आगे नहीं जाने दिया। मार्च दिल्ली-यूपी गेट से 11 मूर्ति तक होना था।
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मार्च रोके जाने पर शिया समुदाय के धर्मगुरु कल्बे जव्वाद समेत सैकड़ों लोगों ने गिरफ्तारियां दी। पुलिस ने औपचारिकताएं पूरी कर गिरफ्तार लोगों को बाद में थाने से ही छोड़ दिया।

वहीं शिया धर्मगुरु ने समुदाय के लोगों से लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का बहिष्कार करने और अमेठी व रायबरेली में उसे वोट नहीं देने की अपील की है।

निशाने पर रहे कांग्रेस विधायक अहमद पटेल

कर्बला विवाद को सुलझाने की मांग लेकर जव्वाद और अंजुमन-ए-हैदरी ने शिया समुदाय से यूपी गेट से 11 मूर्ति तक मार्च का ऐलान किया था। इसके लिए सुबह 11 बजे दिल्ली-यूपी गेट पर जुटने को कहा गया था।

मंगलवार सुबह अंजुमन के लोगों ने सभी को वैशाली मेट्रो स्टेशन के पास पार्क में इकट्ठा किया। करीब 3.30 बजे मौलाना जव्वाद भी पार्क में पहुंचे। उनके नेतृत्व में यहां से सैकड़ों की तादाद में लोग पैदल मार्च करते हुए करीब 4.20 बजे दिल्ली-यूपी गेट पहुंचे।

ज्यादातर लोगों ने अपने सिर पर पट्टियां बांधी हुई थीं। लोग दिल्ली पुलिस, अहमद पटेल और कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। दिल्ली-यूपी गेट पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। भीड़ ने बेरीकेड तोड़कर आगे जाने का प्रयास किया, लेकिन सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम को तोड़ नहीं सके।

शीला से लेकर सोनिया भी मुश्किल में

मौलाना जव्वाद ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए पुलिस का सहयोग करने को कहा। वहीं भीड़ को संबोधित करते हुए मौलाना जव्वाद ने कहा कि शीला दीक्षित ने कर्बला विवाद सुलझाने में टांग अड़ाई, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

मौलाना का आरोप था कि सोनिया गांधी के सलाहकार अहमद पटेल उनको गुमराह कर रहे हैं। इसका खामियाजा कांग्रेस को चुनाव नतीजे आने के बाद पता चल जाएगा। मौलाना ने कहा कि जब तक करबला विवाद नहीं सुलझ जाता उनका आंदोलन चलता रहेगा।

बाद में मौलाना के कहने पर भीड़ ने दिल्ली पुलिस को अपनी गिरफ्तारी दी। पुलिस सभी लोगों को बॉर्डर पर बुलाई गई डीटीसी बसों में बिठाकर मधु विहार थाने ले आई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक सभी को औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छोड़ दिया जाएगा।

काम आया दिल्ली पुलिस का इंतजाम

अंजुमन-ए-हैदरी और मौलाना कल्बे जव्वाद की ओर से की गई मार्च की अपील के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सुबह से गाजीपुर बार्डर और महाराजपुर बार्डर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त अजय कुमार, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त के अलावा कई एसीपी और तकरीबन सभी थानों के एसएचओ को सुरक्षा में लगाया गया था।

दिल्ली पुलिस के अलावा सीआरपीएफ की कई कंपनियां, दमकल की गाड़ियां, वाटर कैनन, घुड़सवार पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। इसके अलावा 11 मूर्ति जाने वाली सड़कों पर भी पुलिस का कड़ा पहरा था।
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शक के चलते बाराती भी फंसे रहे

शिया समुदाय के लोगों के मार्च को देखते हुए पुलिस कुछ ज्यादा ही सजग दिखी। यही वजह थी कि दिल्ली की सीमा में प्रवेश कर रहे जिस वाहन में भी कोई शख्स टोपी लगाए बैठा दिखाई दिया, पुलिस ने उसे रोक लिया।

अच्छी तरह जांच-पड़ताल के बाद ही उन वाहनों को दिल्ली की सीमा में प्रवेश करने दिया। पुलिस की सख्ती का नमूना इससे पता चलता कि मुजफ्फरनगर से आ रही बारात की दो बसों के साथ कुछ पुलिस कर्मियों द्वारका सेक्टर-18 तक भेजा गया।

पुलिस की दोनों गाड़ियां उन बसों को अपना शक दूर करने के लिए द्वारका के समुदायिक घर (बारात घर) तक छोड़कर आईं।
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