जीवन में शिक्षा का कितना महत्व है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुन्हाना खंड के गांव भूरियाकी में दोनो पैरों से अशक्त महिला शहनाज बानो को पढ़ाई की बदौलत गांव का सरपंच बनने का गौरव हासिल हुआ है।
प्रदेश सरकार द्वारा पंचायत चुनाव में प्रत्याशी के शिक्षित होने की अनिवार्यता लागू होने से वह इस मूुकाम तक पहुंचीं। अब वे गांव का चहुंमुखी विकास कराना चाहती हैं।
भूरियाकी गांव की नवनिर्वाचित सरपंच शहनाज बानो बीए पास है और अरबी, उर्दू भाषा में उन्हाेंने मोलवियत पास ही हुई है। वह हिंदी, फारसी और अंग्रेजी भाषाओं को भी बेहतरीन तरीके से जानती है।
झडमल खान भूरियाकी गांव के दो बार सरपंच रह चुके हैं। इस बार गांव में सरपंच पद महिला के लिए आरक्षित हो गया। झडमल के दो बेटे हैं पर दोनो बेटों की बहुएं अनपढ़ है।
ऐसे में उन्होंने जब पढ़ी लिखी महिला की तलाश की तो उनकी नजर अपने ही परिवार की बीए पास शहनाज पत्नी फखरूदीन पर पड़ी। शहनाज दोनों पैरों से अशक्त हैं, जो खडे़ होकर चल नहीं सकतीं।
फिर भी झडमल ने अपनी विरासत बचाने के लिए अपने कुनबे ही शहनाज बानो को सरपंच पद का उम्मीदवार बना दिया और शहनाज ने गांव की शहरूना पत्नी नफीस को 112 वोटों से हराकर जीत हासिल की।
नवनिर्वाचित सरपंच शहनाज बानो का कहना है कि अगर वह शिक्षित नहीं होती तो शायद ही उन्हें अपने गांव के विकास के लिए कुछ करने का मौका मिलता।
उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के सहयोग से गांव में शिक्षा, विकास, बिजली, पीने का पानी, सफाई आदि सुविधाओं पर ज्यादा जोर देगी।
शहनाज का कहना है कि भले ही वह अशक्त हैं, लेकिन अपने गांव का इतना विकास कराएंगी, जितना 60 साल में भी नहीं हुआ होगा। वह गांव की लड़कियों को खुद पढ़ाएंगी।
गांव में पांचवीं तक गर्ल्स स्कूल भी खुलवाएंगी। पूर्व सरपंच झडमल और हामिद का कहना है कि शहनाज भले ही अपाहिज हो, लेकिन हम उसके दोनों पैर बनकर उनका सहयोग करेंगे।