पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के राजनीतिक सचिव रहे पवन खेड़ा पर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का आरोप लगा है। राजपाल सिंह नाम के शख्स ने अपने बेटों को एनडीएमसी में नौकरी दिलवाने के नाम पर कांग्रेस पार्टी के फंड में छह लाख रुपये जमा करवाने का आरोप लगाया है
साकेत अदालत स्थित अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट ने पुलिस को पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 29 नवंबर को होगी।
अदालत ने याची राजपाल सिंह के अधिवक्ता गौरव बंसल के तर्क सुनने के बाद यह निर्देश दिया। बंसल ने कहा उनका मुवक्किल जहांपनाह जंगल में बतौर गार्ड काम करने वाले अपने जीजा के जरिये एक अन्य गार्ड प्रताप से मिला। उसने राजपाल को उसके दोनों बेटों को सरकारी नौकरी दिलवाने का आश्वासन दिया।
उसने मुवक्किल को भानू प्रताप शर्मा से मिलवाया, जिसने खुद को पवन खेड़ा का सहायक बताया। भानू ने कहा कि यदि वह कांग्रेस पार्टी के फंड में छह लाख रुपये देगा तो उनके बेटों को सरकारी नौकरी जरूर मिल जाएगी। बेटों के भविष्य को देखते हुए राजपाल ने छह लाख रुपये जमा करा दिए।
इसके बाद प्रताप ने राजपाल को पवन खेड़ा के लेटरहेड पर सिफारिशी पत्र दे दिया। याची के दोनों बेटों से एनडीएमसी के फॉर्म भरवाए, लेकिन आज तक उन्हें नौकरी नहीं मिली।
उनके मुवक्किल ने धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार की शिकायत 14 अक्टूबर 2013 को अंबेडकर नगर थाने में दी, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। इसलिए खेड़ा समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।