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थाने के अंदर से ममता चिल्ला रही थी, उसके पति को पुलिस ने मारा

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शाहनवाज उर्फ शानू की मौत ने दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। वारदात के समय शानू के साथ मौजूद उसकी पत्नी ममता को पुलिस मंगलवार दिन भर मीडिया से बचाती रही।
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ममता को नंद नगरी थाने से बाहर नहीं निकलने दिया गया। जब मीडिया को देखकर ममता ने थाने से बाहर आने का प्रयास किया तो पुलिसकर्मियों ने उसे जबरन जिप्सी में बिठा लिया।

ममता ने वहीं से जोर-जोर से चिल्लाकर पुलिसकर्मियों द्वारा पति की पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगाया। वहीं, घटना स्थल पर मौजूद एक चाय वाले ने भी पुलिस कर्मियों पर शानू को बुरी तरह पीटने के आरोप लगाए हैं। सूत्रों की माने तो कई ऐसे सवाल हैं, जिनमें खुद दिल्ली उलझती हुई दिखाई दे रही है।
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पुलिसकर्मी उसे जिप्सी में डालकर ले गए

सूत्रों की मानें तो शानू की मौत के बाद आनन-फानन में न्यायिक जांच के आदेश देने के बाद रात को ही ममता के बयान करा लिए गए। सोमवार को दिए बयानों को अब ममता बदलना चाहती है।

वहीं मंगलवार को गगन ट्रैफिक सिग्नल के पास मौजूद चाय बेचने वाले लोकेश ने बताया कि सोमवार शाम को जब शानू की पुलिसकर्मियों से झड़प हुई थी तो वह वहां पर मौजूद था।

हालांकि शानू ने पहले पुलिसकर्मियों से बदसलूकी की थी, लेकिन बाद में पुलिसकर्मियों ने उसे बुरी तरह पीटा। फरहा और ममता उसे बचाने का प्रयास करती रही। अधमरा होने के बाद पुलिसकर्मी उसे जिप्सी में डालकर ले गए। इधर, देर रात परिवार को शानू की मौत की सूचना नहीं दी गई।

भजनपुरा के मूंगा नगर में रहने वाली शानू की बहन शमा ने बताया कि रात तीन बजे पुलिसकर्मी उसके घर पहुंचे और शानू की तबीयत खराब होने की सूचना दी। शमा ने रात को ही शानू की पहली पत्नी नीलोफर को सारी बात बताई।
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30 सितंबर को उसे जेल में सरेंडर करना था

शमा, नीलोफर और विजय पार्क में रहने वाली शानू की दूसरी बहन गुड़िया तड़के जीटीबी अस्पताल पहुंचे तो वहां शानू की मौत का पता चला। उन्होंने जब ममता से मिलने का प्रयास किया तो उन्हें भी उससे नहीं मिलने दिया गया।

पुलिसकर्मियों ने बताया कि जिप्सी में हार्टअटैक से शानू की मौत हो गई। ऐसे में अगर शानू की रात को ही मौत हो गई थी तो परिवार को क्यों सूचना नहीं दी गई।

पुलिस के मुताबिक शानू सुल्तानपुरी थाने का बीसी था। उसके खिलाफ वहां पर सात आपराधिक मामले दर्ज थे। फिलहाल वह पुलिसकर्मियों पर गोली चलाने के मामले में जेल में बंद था।

ममता के गर्भवती होने पर मई माह में शानू तीन माह की पैरोल लेकर जेल से बाहर आया था। उसने अपनी तीन माह की पैरोल और बढ़वा ली थी। अभी 30 सितंबर को उसे जेल में सरेंडर करना था।
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