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स्कूल में पेट्रोल छिड़ककर लगाई आग, मौत

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फरीदाबाद के सेक्टर-29 स्थित होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल में 26 नवंबर को शरीर पर पेट्रोल छिड़क खुद को आग लगाने वाले छात्र कौस्तुब पंडित उर्फ देव की सोमवार तड़के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई। मृतक की मां ने सेक्टर-31 थाने में संस्कृत टीचर और स्कूल प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
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मालूम हो कि सेक्टर-29 निवासी प्रीति शंकर शंखाधार का बेटा कौस्तुब (13) इसी सेक्टर स्थित होली चाइल्ड पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। 26 नवंबर को साढ़े आठ बजे प्रार्थना समाप्त होने पर कक्षा में जाने के बजाय शौचालय पहुंच कर उसने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा ली थी।

उसे नाजुक हालत में सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 17 दिसंबर को होश में आने के बाद उसने संस्कृत टीचर पूनम डडियाल से परेशान होकर आग लगाने की बात अपनी मां को बताई थी। इलाज के दौरान सोमवार तड़के 5:30 बजे उसकी सांसें थम गईं।
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आखिकार नहीं बच सका बेटा

एसएचओ सेक्टर-31 गुलाब सिंह ने बताया कि प्रीति की शिकायत पर संस्कृत टीचर पूनम डडियाल, प्रिंसिपल, चेयरमैन, प्रबंधक और मालिक के खिलाफ आत्महत्या को मजबूर करने और जुवेनाइल एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

करीब 55 फीसदी झुलसे कौस्तुब के बचने की उम्मीदें 27वें दिन उसकी मौत के साथ ही खत्म हो गईं। डाक्टरों की मिन्नत और भगवान से दुआएं कर थक चुकी प्रीति अपने बेटे की मौत से मानो टूट गई हैं।

परिवार के करीबियों ने बताया कि इन 27 दिनों में शायद ही किसी रात वह सोई हों। बेटे की जान बच जाए, इसके लिए उसने सभी जतन किए। न जाने कितने मंदिरों के दर्शन और मजारों पर चादर चढ़ाने की मन्नतें मानीं, लेकिन सब बेकार गया।

सफदरजंग में इंटेंसिव बर्न केयर यूनिट में पड़े कौस्तुब को 17 दिसंबर को होश आया था। करीबियों ने बताया कि बीस दिन बाद उसके होश में आने पर प्रीति के साथ ही सबको यह लग रहा था कि अब वह ठीक हो जाएगा।

आग की लपटों में घिरे कौस्तुब की सांस के साथ धुआं भी चला गया था। इस वजह से उसकी सांस नली भी अंदर से झुलस गई थी। इससे संक्रमण हो गया था। एक दिसंबर को डॉक्टरों ने उसकी श्वसन प्रणाली की सर्जरी करने का निर्णय लिया था। हालत स्थिर नहीं होने की वजह से सर्जरी बार-बार टलती रही, आखिरकार उसने दम तोड़ दिया।
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चपरासी-गेटकीपर कह कर पुकारती थी टीचर

चपरासी-गेटकीपर कह कर पुकारती थी टीचर

प्रीति शंखवार का आरोप है कि 17 दिसंबर को होश में आने पर कौस्तुब ने उन्हें बताया था कि संस्कृत टीचर पूनम डडियाल उसके साथ काफी दिनों से दुर्व्यवहार कर रही थीं। क्लास में बच्चों के सामने उसे चपरासी, गेटकीपर जैसे अपमानजनक शब्दों से बुलाती थीं। टीचर अन्य बच्चों के साथ उसको भी मारती और धमकाती थीं। मां का आरोप है कि टीचर की प्रताड़ना से तंग आकर ही कौस्तुब ने खुदकुशी का प्रयास किया।

बेटे की परवरिश के लिए नहीं की शादी

मूल रूप से मुरादाबाद यूपी की रहने वाली प्रीति का विवाह फरीदाबाद निवासी शिवशंकर शंखाधार से 1991 में हुआ था। 2003 में जब कौस्तुब गर्भ में था, उसके पिता की मौत हो गई थी। प्रीति ने कौस्तुब और उस समय करीब सात साल उम्र के बड़े बेटे क्षितिज की परवरिश के लिए परिजनों की सलाह के बावजूद दूसरी शादी नहीं की।

बच्चों को लेकर वापस मायके जाने की बजाय प्रीति ने फरीदाबाद में ही रहकर संघर्ष किया। आर्थिक तंगी के चलते बड़े बेटे को वह ज्यादा नहीं पढ़ा सकी। सेक्टर-29 में किराये की दुकान में ब्यूटी पॉर्लर खोलने से आर्थिक हालात सुधरे तो कौस्तुब को बड़ा अधिकारी बनाने का सपना लिए उसने अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया था।

पति की मौत का दुख भुलाने की कोशिश कर रही प्रीति का गम बेटे की मौत के बाद कई गुना ज्यादा हो गया है। आंखों से बार बार छलक रहे आंसू उसके गम को बयान कर रहे थे।
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