नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर जामिया के साथ-साथ जेएनयू में विद्यार्थियों के विरोध को भुनाने में कांग्रेस ने बढ़त लेने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। सांसद शशि थरूर के साथ प्रदेशाध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने इस मुद्दे को हाईजैक कर एक बड़े वोट बैंक पर कब्जा जमाने के लिए सियासी दांव खेल दिया है। इससे पार्टी को विधानसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है।
इस मामले पर आप चुप है तो भाजपा इसे हिंदू अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का कानून बताते हुए विपक्षियों पर देश को बांटने की साजिश का आरोप लगा रही है। इस मामले पर कांग्रेस लगातार आप और भाजपा पर निशाने साध रही हैं।
दिल्ली चुनाव की सुगबुगाहट तेज होते ही सबसे पहले कांग्रेस ने जामिया हिंसा में जख्मी छात्रों के इलाज में मदद का भरोसा दिया था। हिंसा के दौरान जामिया की लाइब्रेरी में बैठे एक छात्र की आंख में चोट लगने के बाद कांग्रेस नेताओं ने उसके जख्म को भरने की कोशिश की। सुभाष चोपड़ा ने ऐसे छात्रों के लिए 24 घंटे दरवाजे खुले रखने की बात कहकर दिलों में जगह बनाई। उसने जामिया के छात्रों को खुलकर समर्थन दिया।
पार्टी ने सीएए पर दावा किया कि उसे दिल्ली की सत्ता मिली तो इस कानून में संशोधन होगा। एनपीआर और एनआरसी को भी संशोधित रूप में ही लागू किया जाएगा। पार्टी ने इस मुद्दे को चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने का भी दावा किया है। उन्होंने सीएए में संशोधन तक इसका विरोध जारी रखने की बात कही थी।
थरूर ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
वरिष्ठ नेता शशि थरूर इस मामले में पुलिस के साथ ही दिल्ली के मुख्यमंत्री के रवैये पर भी सवाल उठा चुके हैं। कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय में उन्होंने कहा था कि जामिया में बगैर इजाजत पुलिस कार्रवाई हो सकती है तो जेएनयू हिंसा के दौरान पुलिस को अंदर जाने से किसने और क्यों रोका। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी मसले पर विरोध जताने का सभी को अधिकार है। फिर छात्रों के साथ बर्बरता क्यों हुई? उन्होंने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के घायल छात्रों का हालचाल न पूछने पर सवाल उठाया था कि क्या उन्हें भी पुलिस की तरह ऊपर से किसी का निर्देश मिला था। एक सीएम को विश्वविद्यालय में छात्रों पर हुई बर्बर कार्रवाई की परवाह नहीं तो दोबारा सत्ता में आने पर वह किसकी परवाह करेंगे।
आप के साथ गया जनाधार पाने की आस
कांग्रेस के नेताओं का अनुमान है कि जामिया जाकर शशि थरूर के खुलकर सामने आने से पिछले चुनाव में आप के साथ गए उसके वोटर वापस लौट सकते हैं। ऐसा हुआ तो पार्टी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।