शरजील इमाम (फाइल फोटो)
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शरजील के अधिवक्ता ने कहा कि धक्का देना और थप्पड़ मारना हमले के दायरे में आता है। इमाम ने आरोप लगाया था कि 30 जून को तिहाड़ जेल परिसर के अंदर एक सुरक्षा जांच के दौरान उन पर हमला किया गया और उसे आतंकवादी कहा गया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उनके कॉर्नर रूम सेल के अंदर कुछ सेवादारों ने धक्का दिया और पीटा। सेवादार कैदी हैं जो जेल कर्मचारियों की सहायता करते हैं।
उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि हमले से जेल प्रशासन की मंशा का पता चलता है। हालांकि घटना के समय सहायक जेल अधीक्षक मौजूद थे, उन्होंने स्थिति को शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। इमाम के वकील अहमद इब्राहिम ने कहा कि जेल अधिकारियों के हलफनामे के मुताबिक घटना के दौरान उपाधीक्षक मौजूद थे। उन्होंने इस जवाब को झूठा बताते हुए कहा उन्हें फुटेज में कहीं नहीं देखा गया था। वकील ने कहा कि फुटेज से पता चलता है कि तलाशी के दौरान सेवादारों की कोई निगरानी नहीं थी। अदालत ने उनके तर्क पर मामले की सुनवाई 1 अगस्त तय करते हुए जेल अधीक्षक और सहायक अधीक्षक सहित तिहाड़ जेल के अधिकारियों को सुनवाई में उपस्थित रहने के लिए कहा है।
दिल्ली पुलिस ने मामले में इमाम के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसने केंद्र सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और असंतोष को भड़काने वाले भाषण दिए और लोगों को उकसाया जिसके कारण दिसंबर 2019 में हिंसा हुई।