अपने परिजन को खोने के बाद स्ट्रेचर पर डेड बॉडी रख कर पीड़ित परिजन कभी एंबुलेंस तो कभी पोस्टमार्टम घर में डेड बॉडी को रखवाने की जुगत में अस्पताल में एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहे।
निजी एंबुलेंस ऑपरेटरों की हड़ताल होने के बाद भी अस्पताल की ओर से पीड़ित के लिए सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की गई। लिहाजा चार घंटे से ज्यादा समय तक स्ट्रेचर पर ही शव रखा रहा।
मृतक रोहित के चाचा परमानंद ने बताया कि मंगलवार सुबह 11 बजे के करीब मौत हुई है, इसके बाद से डेड बॉडी स्ट्रेचर पर लेकर इधर-उधर घूमने को मजबूर रहे।
हड़ताल होने की वजह से दिक्कत आ रही है
उन्होंने बताया कि शव बिहार ले जाना है लेकिन एंबुलेंस ऑपरेटरों की हड़ताल होने की वजह से दिक्कत आ रही है। अस्पताल की ओर से एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की जा रही है।
अपनी परेशानी परमानंद ने अस्पताल के डॉक्टरों के सामने रखी लेकिन कहीं से भी उसे कोई सहायता नहीं मिल पाई। पोस्टमार्टम घर के कर्मचारियों ने उसे कहा कि यदि चीफ मेडिकल ऑफिसर लिख कर दे देते हैं तो डेड बॉडी रख ली जाएगी।
इसके बाद पीड़ित परिजन सीएमओ से यह लिखवाने के लिए आपातकालीन विभाग गए, लेकिन वहां उन्हें यह कहते हुए मना किया गया कि जिस विभाग में इलाज चल रहा था वहां के डॉक्टर से लिखवा कर लाओ।
इलाज के दौरान मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई
बाद में इलाज के सभी दस्तावेज दिखाने के बाद सीएमओ ने शव को पोस्टमार्टम घर में रखवाने की इजाजत दे दी। इसके बाद दोपहर करीब चार बजे शव को पोस्टमार्टम घर में रखवाया जा सका।
मूल रूप से बिहार के जमुई जिले का रहने वाला रोहित (30) दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में रहते थे। तीन दिन पहले उसे आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, उसके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।
इलाज के दौरान मंगलवार सुबह उसकी मौत हो गई।