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शालीमार बाग हादसाः धुएं के गुबार में गेट नहीं खोल पाई थीं महिलाएं

Mon, 16 Dec 2019 07:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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शालीमार बाग अग्निकांड - फोटो : अमर उजाला
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शालीमार बाग स्थित इमारत में लगी आग के दौरान फैले धुएं की वजह से दो महिलाएं ऊपर का गेट नहीं खोल पाईं और उनका दम घुटने लगा। जान बचाने के लिए दोनों महिलाएं ऊपर की ओर भागी थी। उन्होंने गेट पर लगे ताले को खोल भी लिया था, लेकिन कुंडी खोल पाने से पहले ही अचेत होकर गिर गईं। बाद में अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

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इमारत की बनावट इस तरह की है कि हादसे के 18 घंटे बीत जाने के बाद भी सीढ़ियों पर चढ़ने का प्रयास किया गया तो दम फूलने लगा। नीचे से ऊपर तक बनी सीढिय़ों में कहीं भी हवा निकलने की जगह नहीं है। इसमें लिफ्ट जरूर लगी है। पहली मंजिल पर आग लगने के बाद लपटें बाहर की तरफ से ऊपर जा रही थीं। वहीं कमरे से निकला धुआं सीढ़ियों पर फैल गया। 

इसकी वजह से लोग बाहर नहीं निकल पाए। चौथी मंजिल पर मौजूद किरण और उनकी परिचित सोमवती छत की ओर भागीं। छत के गेट के दरवाजे पर लगे ताले को उन्होंने खोल लिया, लेकिन कुंडी खोलने से पहले ही अचेत होकर गिर गईं। बाद में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। सोमवती राणा प्रताप बाग में रहती थीं। किरण भी पहले उनके पड़ोस में ही रहती थीं। सोमवती उनसे मिलने आई थीं। 
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सत्संग में जाने से बच गई जान 
पहली मंजिल पर रहने वाले नवनीत जैन ने बताया कि वह यहां साढ़े तीन साल से अपनी पत्नी मीनाक्षी जैन के साथ रहते हैं। उनके दो बेटे वैभव रोहिणी और विशेष शालीमार बाग में पत्नी व बच्चों के साथ रहते हैं। नवनीत की टैंक रोड पर कपड़े की दुकान है। शनिवार सुबह वे दुकान पर गए थे। शाम को घर पहुंचे तो बालकनी से धुआं निकलते देखा। 

उन्हें लगा कि उनकी पत्नी घर में मौजूद है। उन्होंने तुरंत मीनाक्षी को फोन किया। उन्होंने बताया कि वे सत्संग में आई हुई हैं। घर में आग लगने की सूचना पर मीनाक्षी तुरंत पहुंच गईं। तब तक नवनीत पड़ोसियों की मदद से घर के शीशे तोड़कर उस पर पानी का छिड़काव कर आग बुझाने का प्रयास कर रहे थे।  

निरीक्षक ने आग में फंसे लोगों को बचाया 
तीसरी मंजिल पर लाजवंती बेटी ऐना और पोते-पोती अंक्षित और वंशिका के साथ रहती हैं। आग लगने के दौरान सभी अपने घर में थे। वे सभी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे। इमारत के सामने रहने वाले मध्य जिले के स्पेशल स्टाफ के निरीक्षक ललित को आग की जानकारी मिली। 
ललित ने तुरंत बच्चों से फोन पर बात की और उन्हें बाथरूम में गीला कपड़ा लपेटकर जमीन पर लेटने के लिए कहा। परिवार के सदस्यों ने ऐसा ही किया, लेकिन धुआं घर में भर जाने की वजह से उनकी हालत बेहोशी जैसी हो गई थी। पुलिस ने चारों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन सांस लेने में दिक्कत की वजह से उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। 

नहीं था कोई आपातकालीन दरवाजा
लोगों ने बताया कि इस इमारत का निर्माण चार साल पहले किया गया था। इस इमारत के भूतल पर पार्किंग है और उसके पीछे एक गेट है। उसमें हमेशा ताला लगा रहता है। मेन गेट से अंदर घुसते ही बायीं तरफ बिजली का मीटर है और दाहिनी तरफ सीढ़ियां हैं। उसके पास ही लिफ्ट है। सीढ़ियों पर हवा निकलने का कोई जगह नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आग भूतल पर लगती तो किसी को भी नहीं बचाया जा सकता था। जब आग लगी तो उससे पहले बिजली दो तीन बार हाई और लो हुई थी। आशंका है कि पहली मंजिल पर लगे एयर कंडिशनर में स्पार्क हुआ होगा और उसके बाद आग भड़क गई होगी। उधर, अग्निकांड में मृत तीनों महिलाओं के शव पुलिस ने रविवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। दो बच्चों समेत चार लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। चारों की हालत स्थिर है। पुलिस ने रविवार को घटनास्थल का मुआयना किया।

कांता को नहीं बचा पाया कुणाल 
पहली मंजिल पर आग लगने के बाद इस इमारत के सामने रहने वाला कुणाल धुआं निकलता देखकर अपने घर से भागकर इस इमारत में घुसा। उसने दूसरी मंजिल पर पहुंचकर वहां रहने वाली कांता की बहन और उसके बेटे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी दौरान सीढ़ियों पर धुआं भरना शुरू हो गया था। इससे पहले कि वह कांता को निकाल पाता, सीढ़ियों पर धुआं इतना बढ़ गया कि कांता उसमें फंस गई। बाद में पुलिस व दमकल कर्मियों ने कांता को अचेत अवस्था में बाहर निकाला। अस्पताल में उन्हें मृत घोषित किया गया।

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