भूकंप का अगला निशाना दिल्ली-एनसीआर हो सकते हैं। यहां जबरदस्त तबाही का सामना करना पड़ सकता है। यह न तो अफवाह है और न ही बेवजह डराने का प्रयास। देश-विदेश के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने इसका खुलासा किया है।
हिमालय के केंद्र में भूकंप का कारण बनने वाली प्लेटों में खिंचाव शुरू हो गया है। ऐसे में भूकंप भले ही गुवाहाटी में आए, दिल्ली-एनसीआर का हिलना तय है।
विशेषज्ञों के अनुसार 5 से 25 साल के मध्य में आने वाले भूकंप से इस क्षेत्र को बड़ी तबाही का सामना करना पड़ सकता है।
भूगर्भ वैज्ञानिक इं. नवीन कुमार दास के अनुसार जमीन में मुख्यत: चार परत पाई जाती हैं। इनको इनर कोर, आउटर कोर, मेटल एंड क्रस्ट और लिथोस्पेयर कहा जाता है।
लिथोस्पेयर कोर 50 किमी मोटाई की होती है, इनको टेक्टोनिकल प्लेट कहते हैं। यूरेशियन टेक्टोनिक और टेक्टोनिक प्लेट होती हैं। इन प्लेटों में सालाना पांच सेंमी का खिंचाव आ रहा है।
मौसम एवं पर्यावरण वैज्ञानिक डा. एके अहलूवालिया के अनुसार प्लेट में खिंचाव से हिमालय की गहराई में उथल-पुथल शुरू हो गई है। अहमदाबाद सिसमोलाजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डा. बीके रस्तोगी के अनुसार यह खिंचाव असामान्य है।
पहाड़ी क्षेत्रों में हो रहे मानवीय हस्तक्षेप और मैदानी क्षेत्रों में हरियाली की कमी, बढ़ते प्रदूषण से इसका खतरा और बढ़ गया है। कैब्रिज यूनिवर्सिटी के अर्थ एंड साइंस डिपार्टमेंट के हेड डा. जेम्स जैकसन केशोध के अनुसार इस भूकंप की तीव्रता 8 और 9 के बीच हो सकती है।