दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना सैयद अहमद बुखारी द्वारा पुत्र को नायब इमाम घोषित करने के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इसमें कहा गया है कि जामा मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और इमाम बोर्ड का कर्मचारी। वह अपने पुत्र को किस आधार पर इमाम के पद पर नियुक्त कर सकते हैं?
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति आरएस एंडला की खंडपीठ के समक्ष याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। याचिका जामा मस्जिद क्षेत्र निवासी सुहेल अहमद खान ने दायर की है।
इसमें शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी के खिलाफ कई आरोप लगाते हुए वक्फ बोर्ड को जामा मस्जिद का कामकाज अपने हाथ में लेने का निर्देश देने की अपील की गई है। सुहेल अहमद खान ने कहा कि सैयद अहमद बुखारी 13वें शाही इमाम हैं। उनकी नियुक्ति 14 अक्तूबर 2000 को हुई थी।