प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वे मध्यस्थों से बातचीत करेंगी, लेकिन पुलिस के किसी भी अधिकारी से नहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध नजर आ रही है।
उधर, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले शाहीन बाग में मामूली भीड़ थी, लेकिन इसके बाद वहां लोग जमा हो गए। भीड़ मंच के पास तक पहुंचने लगी। हर कोई कोर्ट के इस फैसले पर चर्चा करता नजर आया। कुछ लोग इस फैसले को गलत भी बता रहे थे।
दो महीने से परेशान हैं दिल्ली नोएडा के लाखों लोग
शाहीन बाग में दो महीने से ज्यादा समय से रास्ता बंद करके चल रहे धरना-प्रदर्शन से दिल्ली और नोएडा के लाखों लोग परेशान हैं। प्रदर्शन के कारण नोएडा की ओर जाने वाली सड़क बंद पड़ी है। इसके कारण लोगों को कई किलोमीटर लंबा रास्ता तो काटना ही पड़ रहा है, वाहनों के दबाव के कारण उन पर भारी जाम भी रहता है।
शाहीन बाग के प्रदर्शन में अब अगुवाई की होड़
शाहीन बाग प्रदर्शन की पटकथा का लेखक देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के स्कॉलर शरजील इमाम को माना जाता है। बताया जाता है कि शरजील सबसे पहले प्रदर्शनस्थल पर लोगों को लेकर बैठा था। इसके बाद उसे दूसरे लोगों का साथ मिलता चला गया।
उसकी गिरफ्तारी के बाद प्रदर्शन का नेता बनने की होड़ में कई गुट बन गए हैं। इन गुटों के बीच मंच पर लगभग रोज कहासुनी की नौबत आ रही है। सोमवार को भी कोर्ट की सुनवाई के बाद दोनों गुट मंच पर आपस में भिड़ गए। इसके बाद महिलाओं ने बीच में आकर हंगामे को शांत कराया।
शाहीन बाग के प्रदर्शन की अगुवाई अब कई हाथों में है। सूत्रों की मानें तो पहला गुट विधायक अमानतुल्ला से जुड़ा हुआ है, जो स्थानीय लोगों में हनक बनाए रखना चाहता है। दूसरा गुट वामपंथी छात्रों का है। एक तीसरा गुट भी है, जो पीएफआई से जुड़ा बताया जा रहा है।
इन सभी के मतभेदों के कारण शाहीन बाग प्रदर्शन में आपस में फूट दिख रही है। हर कोई मंच पर अगुवा बनकर खुद को बड़ा नेता साबित करने में जुटा है। देखना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त मध्यस्थों से कौन-सा गुट बातचीत करेगा। वैसे इनमें से एक गुट रास्ता खोलने के पक्ष में है। उसका मानना है कि इससे कई लाख लोगों को रोज ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ रहा है। बाकी के दोनों गुट प्रदर्शन को जारी रखने के पक्ष में हैं।