नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में पिछले करीब ढाई महीने से सड़क जाम कर बैठे प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने वाले मध्यस्थकारों ने सोमवार को अपनी सीलबंद रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी। इस पर बुधवार को सुनवाई होगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त मध्यस्थकार वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े और वकील साधना रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ को सौंपी। पीठ ने कहा कि वह इस पर गौर करेंगे। पीठ ने साफ किया कि रिपोर्ट की प्रति फिलहाल न तो याचिकाकर्ताओं को दी जाएगी और न ही केंद्र व दिल्ली सरकार के वकीलों को। याचिकाकर्ता भाजपा नेता नंद किशोर गर्ग की ओर से पेश वकील ने पीठ से रिपोर्ट की प्रति मुहैया कराने की अपील की लेकिन पीठ ने उनकी मांग को ठुकराते हुए कहा कि रिपोर्ट हमारे लिए है।
सुप्रीम कोर्ट गर्ग व अमित साहनी की याचिका पर सुनवाई कर रही है। वहीं पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह ने भी मध्यस्थकार के तौर पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि पुलिस ने बेवजह कई सड़कों को ब्लॉक कर रखा है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि दोष शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे लोगों पर मढ़ा जा रहा है। वास्तव में कोर्ट ने हेगड़े से कहा था कि वह चाहे तो हबीबुल्लाह की मदद ले सकते हैं।
17 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने हेगडे़ और रामचंद्रन को मध्यस्थकार नियुक्त करते हुए उन्हें शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर यह समझाने के लिए कहा था कि प्रदर्शन स्थल को शिफ्ट किया जाए। कोर्ट का कहना था कि प्रदर्शनकारियों के कारण समझने की जरूरत है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन करना लोगों का मौलिक अधिकार है लेकिन यहां सवाल सड़क को ब्लॉक करने का है। कोर्ट ने कहा कि हमारी चिंता यह है कि यही तरीका अन्य समूह द्वारा अपनाए जाने पर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी।