शाहबेरी गांव में देखते ही देखते खेती की जमीन पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो गईं। इसकी शुरुआत चार साल पहले हुई थी। जब यहां पर खेती की जमीन पर कॉलोनी काटी गई थी।
इनमें नेताओं से लेकर डॉक्टर, मेडिकल संचालक तक शामिल हैं। इन सभी ने मिलकर 15 से 25 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड बेच डाले। अब उन भूखंड पर फ्लैट बनाकर बेचने का गोरखधंधा चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2011 में पतवाड़ी और शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद्द कर दिया था। कोर्ट का फैसला आने के बाद किसानों ने अपनी जमीन को बेचना शुरू कर दिया। गाजियाबाद और नोएडा के बीच में होने के कारण इस जमीन लोकेशन काफी अच्छी थी।
भू-माफियाओं की नजर थी और उन्होंने धीरे-धीरे किसानों से जमीन खरीदनी शुरू कर दी। जिस पर चार साल पहले प्लॉटिंग कर दी।
हादसे में मरने वाले शिव कुमार त्रिवेदी के परिजनों ने पुलिस को बताया है कि यहां पर एक गिरोह सक्रिय है।
इसमें डॉक्टर, नेता, स्टोर संचालक, प्रॉपर्टी डीलर तक शामिल हैं। मेरठ के एक डॉक्टर और स्टोर संचालक ने यहां पर काफी लोगों को फंसाया है। दोनों भाई हैं। गुरुवार को गिरफ्तार किया गया कासिम बिल्डिंग बनाने का काम करता है।
इनके साथ कुछ स्थानीय लोग भी शामिल थे। जो कमीशन के लालच में लोगों को सपने दिखाकर फंसाने का काम कर रहे हैं। इनमें ऐसे युवा शामिल हैं, जिनके पास रोजगार नहीं है और जल्द ज्यादा पैसा कमाना चाहते है।
यहां 100 वर्ग मीटर का भूखंड सतेंद्र ने भी खरीदा था। सतेंद्र ने 19 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भूखंड खरीदा था। सतेंद्र ने बताया कि यहां कुछ नहीं था। उसके परिवार ने भी कालोनाइजरों से यह भूखंड खरीदा था।
जिस पर तीन मंजिला मकान बना लिया है। कालोनाइजरों ने केवल भूखंड दिए, यहां पर नाली और सड़क नहीं है। अलग-अलग कालोनाइजर ने 500 से अधिक भूखंड बेचे हैं। कुछ पर वे स्वयं अपने फ्लैट बनाकर बेच रहे हैं। जो इमारतें गिरी हैं, उनमें निर्माणाधीन बिल्डिंग में प्रयोग की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता अच्छी नहीं थी। सभी लोगों में इस बात की चर्चा थी।