आम लोगों को किसी सेक्टर में घर या किसी अपार्टमेंट में फ्लैट खरीदने के लिए लोन लेने में कई दस्तावेज इकट्ठा करने पड़त हैं। अक्सर लोन होने में खासा वक्त लग जाता है। लेकिन शाहबेरी जैसी अवैध इमारतों में फ्लैट लेने के लिए बैंक एक सप्ताह में लोन पास कर देती है। सूत्रों के अनुसार सेटिंग के खेल में बिल्डर माफिया फ्लैट के क्षेत्रफल के हिसाब से लोन पास कराने के लिए तीस हजार से 60 हजार रुपये तक अलग से खर्च कर देते हैं।
घर या फ्लैट लेने के लिए बैंक खरीदार की सैलरी स्लिप या आईटीआर, बैंक खाता समेत फ्लैट-घर मानक क्षेत्र में है या नहीं इसकी जांच करते हैं। इस दौरान लोन देन वाले बैंक का एक सुपरवाइजर फ्लैट या घर की स्थिति की जांच करता है। देखा जाता है कि फ्लैट कब्जाई भूमि, डूब क्षेत्र, कृषि भूमि पर तो नहीं बनाए गए हैं। इसके अलावा लैंड ट्रांसफर और रजिस्ट्री के कागज देखे जाते हैं।
रियल स्टेट से जुड़े हुए सुनील गोयल ने बताया कि कॉलोनाइजरों की बैंककर्मियों और लोन दिलाने वाले डायरेक्ट सेल टीम के कर्मियों से सेटिंग होती है। इसके बाद प्लाट पर बनाए गए फ्लैटों का एक ही बैंक से लोन कराया जाता है। बाद में प्रत्येक फ्लैट की रजिस्ट्री करा दी जाती थी। इसमें एक ओर फ्लैट खरीदार से पांच से छह प्रतिशत लिया जाता है जबकि अपनी ओर से फ्लैट पर लोन करने के लिए बिल्डर माफिया 30 से 60 हजार तक देते हैं। इसके बावजूद एक फ्लैट से बिल्डर को काफी मुनाफा हो जाता है।
अब लोन की किश्तें कैसे चुकाएंगे खरीदार
शाहबेरी में तीन खरीदारों ने होमलोन लिया था। उन्होंने फ्लैट की रजिस्ट्री भी करा ली थी। बताया जा रहा है कि चार से पांच अन्य खरीददार भी फ्लैट की बुकिंग करा चुके थे। जमींदोज हुई इमारत में फ्लैटों के लिए लोन को फ्लैट खरीददार अब कैसे चुकता करेंगे। इसको लेकर सवाल उठने लगे हैं।