यामिनी ने बताया कि जब वो तीन साल की थी तब उनके पिता ने दिल्ली के सीपी से शुरुआत की थी। जैसे जैसे बड़ी हुई वह पिता के बिजनेस कौशल और समाजसेवी स्वाभाव से प्रेरित हुई। एलएलएम की पढ़ाई के बाद भी उन्होंने इस व्यवसाय में आगे बढ़ने का इरादा बनाया। पांच साल पहले नोएडा में यामू पंचायत का नया आउटलेट खोला।
महिलाओं को देते हैं ट्रेनिंग
यामिनी का कहना है कि कई विशेषताएं हैं जो हमें आम दुकानों से अलग बनाती हैं। यहां जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम दिया जाता है। इन्हें एक साल तक पान बनाने की ट्रेनिंग देते हैं।
हमारी कोशिश रहती है कि पान बनाने में ऐसे पदार्थों का ज्यादा इस्तेमाल करें जो मस्तिष्क को आराम का अनुभव दें। साथ ही रक्त संचार को बेहतर कर सके। यहां का सादा पान खाने पर आम पानों की तरह मुंह लाल नहीं होता है। वहीं, चबाकर थूकने से गंदगी बढ़ती है, लिहाजा हम ऐसे उत्पाद बनाते हैं जो मुंह में पूरी तरह घुल जाए।