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खास खबर : महाभारत कालीन ऐतिहासिक लाख कला का अद्भुत नमूना पेश कर रहे शादाब

Tue, 17 Nov 2020 01:03 AM IST
Vikas Kumar आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शादाब अहमद महाभारत कालीन का ऐतिहासिक लाख कला का नमूना पेश करते हुए - फोटो : amar ujala
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पीतमपुरा दिल्ली हाट में आयोजित हुनर हाट में देश के कोने-कोने से आकर 100 से अधिक कलाकारों ने स्टॉल लगाया है। यहां के प्रत्येक स्टॉल और उससे जुड़े कलाकार अलग खासियत रखते हैं। लेकिन इन सबके बीच जयपुर के शादाब अहमद ने यहां पर महाभारत कालीन ऐतिहासिक लाख कला का अद्भुत नमूना पेश किया है। 

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हुनर हाट में शादाब अहमद लाख कला की तकनीक से खास महिलाओं के साज श्रृंगार और सुहाग का सामान बनाया हैं। लाख से बना लहरिया कड़ा, आग का कड़ा, नाचते मोर वाला कड़ा लोगों को खासा पसंद आ रहा है। लाख को जयपुर में सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है। दुनिया भर में जयपुर लाख कला प्रसिद्ध है।

शादाब का परिवार 300 सालों से यह काम जयपुर में कर रहा है। शराब के पिता हाजी इकराम अहमद को उनकी लाख कला के लिए संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार की ओर से शिल्प सम्मान के अलावा तमाम राज्यों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सम्मानित किया जा चुका है। अपने पिता की गैरमौजूदगी में उनकी विरासत को अब शादाब आगे बढ़ा रहे हैं। केंद्रीय सूचना लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की ओर से शादाब को भी सर्वोतम कलाकार के सम्मान से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा भी उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं।
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महाभारत काल की कला का प्रमाण
शादाब अहमद के अनुसार लाख कला महाभारत काल से चली आ रही है। पेड़ से निकलने वाली लाख पवित्र मानी जाती है। लेकिन कौरवों ने पांडवों को छल से जलाकर मारने के लिए लाक्षागृह का निर्माण करवाया था। उन्होंने बताया कि लाक्षागृह के विषय में पता लगाने के लिए वह बागपत जिले के बरनावा जाकर लाख पर शोध किया है। उनके अनुसार आज का बरनावा पांडव काल में वारणावत था, जहां कौरवों ने लाक्षागृह का निर्माण करवाया था।

ईरान से भारत आए लाखेर समुदाय के लोग
शादाब अहमद का परिवार ईरान से अफगानिस्तान, लाहौर होते हुए दिल्ली आया। सब लाख का काम करते थे। भारत आकर इस बिरादरी का नाम लाखेर पड़ा। शादाब अहमद ने बताया कि इस वक्त पूरे भारत में लाखेर समुदाय के करीब 30000 लोग रहते हैं। जिनकी सर्वाधिक आबादी जयपुर में रहती है। शादाब ईरान से भारत आई 9वीं पीढ़ी के सदस्य हैं।

कला और कलाकारों को बेहतर मौका
कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग साढे 7 महीने से  रोजी रोटी से दूर हस्तशिल्प और हस्तकला के दस्तकारों को केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय ने उस्ताद योजना के तहत हुनर हाट में अपना हुनर दिखाने का मौका दिया है। शादाब जैसे देशभर के सैकड़ों अन्य कलाकार हुनर हाट में अपने हुनर का जलवा बिखेर रहे हैं। 

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