फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली में नई सरकार से सेक्स वर्कर्स की है एक मांग

विज्ञापन
विज्ञापन
चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार से दिल्ली के लोगों को क्या अपेक्षा है इसके बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली की सेक्स वर्कर्स की भी सरकार से कुछ अपेक्षाएं हैं। इन्हीं अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए उन्होंने वोट भी किया है।
विज्ञापन


दिल्ली चुनाव में वोट करने वालीं सेक्स वर्कर्स चाहती हैं कि इस चुनाव के बाद दिल्ली में जो सरकार बने वह उनके व्यापार को कानूनी दर्जा देने के लिए कदम उठाए।

नाम न छापने की शर्त पर एक सेक्स वर्कर ने बताया कि जीबी रोड इलाके की लगभग 15000 सेक्स वर्कर्स ने इस चुनाव में मतदान किया है।

नहीं बना वोटर कार्ड

जीबी रोड में रहने वाली एक अन्य सेक्स वर्कर ने बताया कि अगर उनके पेशे को कानूनी दर्जा दे दिया जाए तो सरकार से मिलने वाले लाभ उन तक भी पहुंचने लगेंगे।

2008 में काफी प्रयास के बाद मतदाता सूची में सेक्स वर्कर्स का नाम जोड़ा गया। हालांकि अभी भी बहुत सी सेक्स वर्कर को मतदान का अधिकार नहीं है क्योंकि वोटर आईकार्ड बनवाने के लिए उनके पास जरूरी पहचान पत्र नहीं हैं।

जीबी रोड के निवासियों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है। बड़ी दिक्कत उम्र की आखिरी दहलीज पर पहुंची सेक्स वर्कर्स के साथ है। जिनका गुजारा भी बमुश्किल हो पाता है।
विज्ञापन

किन्नरों को भी है सरकार से अपेक्षा

सेक्स वर्कर्स के बीच काम करने वाली भारतीय पतिता उद्धार सभा की उपाध्यक्ष मुन्नी का कहना है कि सालों से वह यहां रह रही हैं। वोट भी कई बार किया है। फिर भी, समाज हमें गंदी नजर से देखता है। देश की सियासत भी हमें तवज्जो नहीं देती। अखबारों से मिलने वाली सूचनाओं से हम अपना मन बनाते हैं।

दूसरी तरफ किन्नरों को भले ही मतदान का अधिकार मिल गया है, कुछ शहरों की मेयर तक चुनी गईं। बावजूद इसके राजधानी के किन्नरों को सरकार से ज्यादा उम्मीद नहीं है। डीयू से ग्रेजुएट सीता किन्नर कहती हैं कि अच्छी सरकार बने। इसके लिए वोट भी देते हैं। लेकिन सरकारों ने हर बार हमें मायूस किया है।

जीबी रोड बल्लीमारान विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। करीब 100 कोठों में तीन हजार से ज्यादा सेक्स वर्कर्स हैं। इनमें से 60 फीसदी की उम्र 20-40 के बीच है। जबकि 40 फीसदी की उम्र 40 साल से ज्यादा है। करीब दो हजार के पास मतदाता पहचान पत्र है। इनमें से करीब 1500 वोट देती हैं। दूसरी ओर दिल्ली में 802 किन्नर मतदाता हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें