अदालत ने विवाह के नाम पर विवाहित युवती से शारीरिक संबंध बनाने वाले आरोपी ईश्वर सिंह को रेप व धोखाधड़ी से बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले विवाह को खत्म किए बिना युवती किसी अन्य के साथ रहने के लिए सांठगांठ नहीं कर सकती।
साकेत स्थित विशेष न्यायाधीश योगेश खन्ना ने अपने फैसले में कहा कि सभी तथ्यों व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि युवती आरोपी बनाए गए सिंह से प्रेम करती थी और सिंह के साथ लिव इन रिलेशन में विवाहित महिला की तरह रहने के जोखिम से पूरी तरह से अवगत थी।
अदालत ने कहा कि युवती विवाहित महिला है और पति से संबंध विच्छेद के बिना किसी अन्य के साथ इस प्रकार नहीं रह सकती। ऐसे में वह यह नहीं कह सकती कि उससे धोखा किया गया है। अदालत ने कहा कि युवती के संबंध में ऐसा दुभाग्यपूर्ण निर्णय देना उनके लिए कठिन है।
पसंद नहीं पति को छोड़ने का आइडिया
अदालत ने कहा कि हो सकता है कि युवती सिंह से प्यार करती थी और उसने उसे पति को छोड़ने के लिए कहा हो। अदालत ने कहा कि युवती वर्ष 2005 से आरोपी सिंह की दोस्त थी इसी बीच उसका विवाह उसके माता-पिता ने किया लेकिन युवती पति को पसंद नहीं करती थी। इसी कारण वह पति को छोड़ कर आरोपी के साथ रहने लगी। ऐसे में रेप या धोखाधड़ी नहीं बनती।
अदालत ने कहा कि युवती के परिवार ने पति को छोड़ने के उसके आइडिया को पसंद नहीं किया व उसे अलग रहने के लिए कहा। वह आरोपी से प्यार करने के कारण ही अपने जोखिम पर उसके साथ विवाहित महिला की तरह रहने लगी। अत: वे संगम विहार निवासी सिंह को इस आरोप से बरी करते है।
युवती ने वर्ष 2013 दर्ज करवाई शिकायत में कहा कि उसकी वर्ष 2005 से सिंह से दोस्ती थी। परिवार ने नवंबर 2009 में उसका विवाह कहीं और कर दिया।
चार बार हुई गर्भवती, जबरन कराया गर्भपात!
इसके बाद आरोपी सिंह उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने लगा, इसी कारण विवाह के एक माह बाद ही उसे ससुराल से निकाल दिया गया। इसके बाद वह अपने माता-पिता के घर गई लेकिन उन्होंने भी घर से निकाल दिया। आरोपी ने उसे विवाह का आश्वासन दिया जिस कारण वह उसके साथ रहने लगी।
महिला ने कहा आरोपी ने जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और उससे मारपीट भी करने लगा। वह चार बार गर्भवती हुई लेकिन आरोपी ने कहा कि विवाह के बाद बच्चा करेंगे और उसका गर्भपात करवा दिया। उसने कहा कि उसका पहले पति से तलाक का केस अदालत में विचाराधीन है।
अदालत ने युवती के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा नहीं माना जा सकता कि गर्भपात उसकी मर्जी के बिना हुआ था। अदालत ने कहा उसने चार बार गर्भपात होने के बावजूद कभी भी पुलिस को शिकायत नहीं की।