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Delhi NCR News: खाली प्लॉटों और नालों में नहीं डाला जाएगा सीवर का स्लज, फरीदाबाद में बनेंगे तीन एफएसटीपी

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राहुल राज
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फरीदाबाद।
स्मार्ट सीटी में सीवर सफाई और सेप्टिक टैंकों से निकलने वाला मल-कीचड़ अब खाली प्लॉटों, नालों और जलस्रोतों में डंप नहीं होगा। खुले में स्लज डालने से भूजल और पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर रोक लगाने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने योजना तैयार की है। प्राधिकरण मिर्जापुर, बादशाहपुर और प्रतापगढ़ में 50-50 किलोलीटर प्रति दिन (केएलडी) क्षमता के तीन फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। एफएमडीए इस परियोजना पर करीब 13 करोड़ रुपये खर्च करेगा। गौरतलब है कि शहर के कई ऐसे इलाके हैं, जहां अभी सीवर नेटवर्क पूरी तरह विकसित नहीं है। यहां घरों और संस्थानों में सेप्टिक टैंक का इस्तेमाल किया जाता है। टैंक भरने के बाद टैंकरों के माध्यम से मल-कीचड़ और स्लज निकाला जाता है। इसके बाद खुले स्थान, खाली प्लॉट, नालों या जलस्रोतों के आसपास डाल देते है। इससे गंदगी के साथ भूजल और पर्यावरण प्रदूषण फैलता है।
नहरों और खाली प्लॉटों में डाला जा रहा स्लज : ग्रेटर फरीदाबाद की कई सोसायटियों और अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क से जुड़ी समस्याएं अभी भी बनी हैं। गुरुग्राम और आगरा नहर में सीवर का गंदा पानी और स्लज डाला जा रहा है। बाईपास रोड से सटे उन क्षेत्रों में भी समस्या गंभीर है, जहां अब तक सीवर लाइन का विस्तार पूरा नहीं हुआ है। ऐसे इलाकों में टैंकरों से निकलने वाले गंदे पानी को खाली प्लॉटों में डाले जाने की शिकायतें लगातार मिल रही है। सेक्टर-24, 25 और 58 के औद्योगिक क्षेत्रों में नालों में दूषित पानी का डाला जा रहा है। बड़खल झील क्षेत्र में भी नालों के जरिये पहुंचने वाले अपशिष्ट को लेकर पर्यावरणीय चिंता बनी हुई है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग-19 और ग्रेटर फरीदाबाद के कुछ हिस्सों में खुले प्लॉटों पर स्लज और कचरा डाले जाने से प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है।
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टैंकर से एफएसटीपी तक पहुंचेगा मल-कीचड़ : प्रस्तावित व्यवस्था में अधिकृत टैंकर से सेप्टिक टैंक का मल-कीचड़ एफएसटीपी तक पहुंचाया जाएगा। यहां प्लास्टिक, कपड़े और अन्य ठोस कचरे को अलग किया जाएगा। इसके बाद ठोस और तरल हिस्से को अलग-अलग कर उपचार किया जाएगा। ठोस पदार्थ को स्लज ड्राइंग बेड जैसी व्यवस्था में सुखाया जाएगा। वहीं, तरल हिस्से का तकनीकी प्रक्रिया के तहत उपचार होगा। इससे जैविक प्रदूषकों और हानिकारक सूक्ष्मजीवों की मात्रा कम की जा सकेगी। उपचार के बाद पानी और ठोस पदार्थ का निर्धारित मानकों के अनुसार सुरक्षित निस्तारण किया जाएगा।
बड़खल मोड़ में स्लज डालने की शिकायत पहुंची थी एनजीटी : बड़खल मोड़ स्थित जे.जे. क्लस्टर के आसपास सीवर सफाई से निकलने वाले स्लज और कचरे को खुले में डाले जाने की शिकायत एनजीटी तक पहुंची थी। बुध कॉलोनी निवासी सुखदेव सिंह ने आरोप लगाया था कि सीवर लाइनों की सफाई के बाद निकलने वाला स्लज पाइपलाइन के किनारे और क्लस्टर के आसपास डाल दिया जाता है। शिकायत के समर्थन में तस्वीरें भी एनजीटी को दी गई थीं। 4 अगस्त 2026 को एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की सुनवाई की। ट्रिब्यूनल ने नगर निगम आयुक्त को जांच कर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
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प्राधिकरण मिर्जापुर, बादशाहपुर और प्रतापगढ़ में एफएसटीपी स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। इनके शुरू होने के बाद सेप्टिक टैंकों और सीवर सफाई से निकलने वाले मल-कीचड़ का वैज्ञानिक तरीके से उपचार व निस्तारण किया जा सकेगा। इससे खुले में स्लज डालने से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगेगी। - समुद्र सिंह, कार्यकारी अभियंता, एफएमडीए
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