दो परिपत्र वापस लेने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। डॉ. भीम राव आंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शनिवार को सातवें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर परिसर में लोहे की जाली और बैरिकेडिंग लगाने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक लगाने तथा छात्रों की आवाजाही और लोकतांत्रिक गतिविधियों पर प्रतिबंध का आरोप लगाया। प्रशासन ने आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
छात्रों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात करीब तीन बजे भूख हड़ताल पर बैठे एक छात्र की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। आरोप है कि प्रशासन ने एंबुलेंस और पुलिस वाहनों को परिसर में प्रवेश नहीं दिया। बाद में किसी तरह छात्र को अस्पताल पहुंचाया गया। इस दौरान जरूरी खाद्य सामग्री और पानी की आपूर्ति भी प्रतिबंधित कर दी गई। छात्रों के अनुसार, सुरक्षा कर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति भी बनी।
शनिवार सुबह कक्षाओं और परीक्षाओं के लिए पहुंचे छात्रों ने आरोप लगाया कि मुख्य द्वार बंद कर उन्हें परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। छात्रों के मुताबिक, प्रशासन ने पुस्तकालय और कंप्यूटर प्रयोगशाला में मरम्मत कार्य का हवाला दिया, जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य होता नहीं दिखा।
विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रो. सत्यकेतु संस्कृत ने छात्रों से प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रशासन को अपील के बजाय छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत कर मांगों पर चर्चा करनी चाहिए। छात्रों ने लोहे की जालियां, आंतरिक बैरिकेडिंग और आवाजाही पर रोक हटाने, शांतिपूर्ण सभा और छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़ी गतिविधियां बहाल करने तथा मांगों पर सीधी बातचीत शुरू करने की मांग की है। आइसा के नेतृत्व में छात्र 31 जुलाई को जारी दो परिपत्रों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।