दादा ने शुरू की, अब पोते संभाल रहे जिम्मेदारी
हजारों कांवड़ियों को मिल रहा भोजन, विश्राम व उपचार
चिराग गुप्ता
पूर्वी दिल्ली। सावन के पवित्र महीने में लाखों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं उनकी सेवा में जुटे कांवड़ शिविर आस्था व समर्पण की अनूठी तस्वीर पेश कर रहे हैं। पूर्वी दिल्ली के सीलमपुर में लगा कांवड़ शिविर पिछले चार दशक से लगातार शिवभक्तों की सेवा में समर्पित है। यह शिविर तीन पीढ़ियों से चली आ रही सेवा परंपरा का प्रतीक बन चुका है।
वर्ष 1984 से संचालित इस शिविर में आज भी वही सेवा भाव है। शिविर संचालक रविंदर गुप्ता बताते हैं कि शुरुआत में सीमित संसाधनों के बीच परिवार के बुजुर्ग स्वयं भोजन बनाते, पानी पिलाते व कांवड़ियों के आराम की व्यवस्था करते थे। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, लेकिन सेवा भावना में कोई कमी नहीं आई। आज इस शिविर में निशुल्क भोजन, स्वच्छ पेयजल, विश्राम व प्राथमिक उपचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
शुरुआत में परिवार के बुजुर्ग सेवा संभालते थे, फिर अगली पीढ़ियां जुड़ती चली गईं। अब जिन्होंने अपने पिता-दादा के साथ सेवा की थी, उनके बच्चे व पोते भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। कोई भोजन वितरण में जुटा है, तो कोई सफाई व पानी की व्यवस्था संभाल रहा है।
हरिद्वार से पहुंचे श्रद्धालु तरुण ने कहा, यहां भोजन-आराम के साथ अपनापन भी मिलता है। शिविर में लाखों श्रद्धालुओं को देखते हुए सुविधाओं का विस्तार किया गया है। चार दशक से जल रही सेवा की यह ज्योत आज भी हजारों श्रद्धालुओं के सफर को आसान बना रही है।