सेक्टर-80 स्थित पार्क ग्रैंड्यूरा में रहने वालों की सुरक्षा रामभरोसे है। हर महीने मेंटीनेंस पर लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी कभी स्कूटी तो कभी किसी का सामान गायब हो जाता है।
आरडब्ल्यूए का आरोप है कि कहने को सुरक्षा के लिए 60 गार्ड लगाए गए हैं मगर ये ड्यूटी टाइम में अक्सर सोए रहते हैं। कई बार मेंटीनेंस एजेंसी से शिकायत के बाद भी हालात नहीं सुधरे। लोगों को डर है कि ये नहीं सुधरे तो कालोनी में कोई बड़ी घटना न घट जाए।
पार्क ग्रैंड्यूरा के 716 फ्लैटों की सुरक्षा के लिए 60 गार्डों को तैनात किया गया है। जो सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति है। आरडब्लयूए उपाध्यक्ष केके पांडेय का आरोप है कि दो शिफ्टो में गार्ड की ड्यूटी लगती है।
रात में 11 बजते ही निगरानी करने की जगह गार्ड सो जाते हैं। कोई भी कॉलोनी में घुस के वारदात को अंजाम दे दे, तो इन्हें पता ही नहीं चलेगा।
एनके मजीठिया का आरोप है कि कई बार इन्हें सोते हुए पकड़ा गया। मेंटीनेंस एजेंसी और बीपीटीपी से शिकायत के बाद भी हालात नहीं सुधरे। दो हफ्ते पहले घर के नीचे खड़ी स्कूटी चोरी हो गई। लोगों की सुरक्षा के साथ बिल्डर मजाक कर रहा है।
हर महीने देते हैं लाखों रुपये:
पार्क ग्रैंड्यूरा के 716 फ्लैटों में 500 परिवार रहते हैं। जो हर महीने 4500 रुपये के हिसाब से मेंटीनेंस के नाम पर बिल्डर को करीब साढ़े बाइस लाख रुपये दे रहे हैं। उसके बावजूद सुरक्षा सवालिया घेरे में हैं। लोगों को परिवार वालों के साथ ही बच्चों की भी चिंता सता रही है।