जिस सेंगोल को लेकर नए संसद भवन के उद्घाटन के वक्त सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए थे, वही सेंगोल अब नौवीं कक्षा के बच्चों को सुशासन का पाठ पढ़ाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जगह दी है।
इसी हिस्से में राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते को मुंडक उपनिषद से और सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य यतो धर्मस्ततो जयः को महाभारत से जोड़ा गया है।
हमलों की नहीं, प्रतिरोध की गाथा
किताब में 1000-1700 ईस्वी का जिक्र है कि लोगों ने हमलों के खतरों का प्रितरोध कैसे किया। इसमें मदुरै के राजा वीरप्पा की कहानी है, जिन्होंने मुगल बादशाह की परंपरा के अनुसार भेजी गई चप्पल को सिर से न लगाकर पहन लिया और कहा कि बादशाह दूसरी भी भेज दें। शाहजहां ने जब भव्य जामा मस्जिद बनवाई थी, उसी समय चित्तौड़ के राजा ने उदयपुर में जगदीश मंदिर बनवाया जो उतना ही भव्य और ऊंचा था।
सत्ता की जगह शासन
भूमिका में एनसीईआरटी ने खुद माना है कि पहले इसमें सत्ता विषय पर अध्याय प्रस्तावित था, जिसकी जगह अब शासन और लोकनीति अध्याय रखा गया है। भारत और विश्व भाग एक वाला अध्याय दसवीं कक्षा में खिसका दिया गया है। यह बदलाव पढ़ाई को अधिक सुसंगत और बच्चों पर कठिन विचारों का बोझ न डालने के लिए किए गए हैं।
लिज्जत पापड़ की कथा
विचार से स्टार्टअप तक अध्याय में उद्यमिता की दो देसी कहानियां हैं। लिज्जत पापड़ की कहानी 1959 से शुरू होती है जहां मुंबई की एक चॉल की सात गृिहणियों ने 80 रुपये और उधार के सामान से काम शुरू किया। इस सहकारी संस्था में 2023 तक 45,000 से ज्यादा महिला सदस्य, 83 शाखाएं और 1,600 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार था।