फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेंगोल: अब बच्चे पढ़ेंगे सुशासन का राजदंड, नौवीं की नई किताब में नया भारत, संसद से लेकर चोल राजवंश तक

Wed, 30 Sep 2026 04:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा सीमा शर्मा, नई दिल्ली

सार

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जगह दी है। 
विज्ञापन
प्रतीक चित्र - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जिस सेंगोल को लेकर नए संसद भवन के उद्घाटन के वक्त सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए थे, वही सेंगोल अब नौवीं कक्षा के बच्चों को सुशासन का पाठ पढ़ाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जगह दी है। 

विज्ञापन


किताब में लिखा है कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे नए संसद भवन में स्थापित किया। इसे धर्मसम्मत शासन के चिह्न के रूप में इस्तेमाल करने की परंपरा चोल राजवंश के दौर में शुरू हुई थी। सेंगोल को अंग्रेजों से भारत के सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सौंपे जाने के दावे पर कांग्रेस ने सवाल उठाए थे। 

आयकर देने में बरतें ईमानदारी  व्यक्तिगत वित्त प्रबंधन वाले अध्याय में बच्चे आयकर की बारीकियां भी जानेंगे। विशेषज्ञ की मदद से वित्त वर्ष 2025-26 से आय पर लगने वाले कर की गणना सिखाई गई है। साथ ही यह संदेश भी है कि ईमानदारी और समय से कर चुकाना हर भारतीय की जिम्मेदारी है। 
विज्ञापन


आजादी की रात नेहरू को सौंपा था सेंगोल 

  • अंडरस्टैंडिंग सोसायटी : इंडिया एंड बियॉन्ड नाम की यह किताब मंगलवार से बाजार में उपलब्ध हो गई है। शासन और लोकनीति वाले अध्याय में भारत के शासकीय प्रतीकों की जड़ें समझाते हुए किताब बताती है कि 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को आजादी के मौके पर पीएम जवाहरलाल नेहरू ने शैव परंपरा के संतों से सेंगोल ग्रहण किया था। 
  • छात्रों से कहा गया है कि वे ऐतिहासिक तस्वीरों के जरिये सेंगोल की यात्रा के बारे में और जानकारी जुटाएं।

इसी हिस्से में राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते को मुंडक उपनिषद से और सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य यतो धर्मस्ततो जयः को महाभारत से जोड़ा गया है। 

  • किताब का तर्क है कि ये प्रतीक केवल सजावटी नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों के वाहक हैं जो संस्थाओं को सुशासन की जिम्मेदारी के साथ सौंपे गए हैं।

हमलों की नहीं, प्रतिरोध की गाथा
किताब में 1000-1700 ईस्वी का जिक्र है कि लोगों ने हमलों के खतरों का प्रितरोध कैसे किया। इसमें मदुरै के राजा वीरप्पा की कहानी है, जिन्होंने मुगल बादशाह की परंपरा के अनुसार भेजी गई चप्पल को सिर से न लगाकर पहन लिया और कहा कि बादशाह दूसरी भी भेज दें। शाहजहां ने जब भव्य जामा मस्जिद बनवाई थी, उसी समय चित्तौड़ के राजा ने उदयपुर में जगदीश मंदिर बनवाया जो उतना ही भव्य और ऊंचा था। 

सत्ता की जगह शासन
भूमिका में एनसीईआरटी ने खुद माना है कि पहले इसमें सत्ता विषय पर अध्याय प्रस्तावित था, जिसकी जगह अब शासन और लोकनीति अध्याय रखा गया है। भारत और विश्व भाग एक वाला अध्याय दसवीं कक्षा में खिसका दिया गया है। यह बदलाव पढ़ाई को अधिक सुसंगत और बच्चों पर कठिन विचारों का बोझ न डालने के लिए किए गए हैं।

लिज्जत पापड़ की कथा
विचार से स्टार्टअप तक अध्याय में उद्यमिता की दो देसी कहानियां हैं। लिज्जत पापड़ की कहानी 1959 से शुरू होती है जहां मुंबई की एक चॉल की सात गृिहणियों ने 80 रुपये और उधार के सामान से काम शुरू किया। इस सहकारी संस्था में 2023 तक 45,000 से ज्यादा महिला सदस्य, 83 शाखाएं और 1,600 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार था। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें