कई मकान महज 30 से 40 गज के छोटे भूखंड पर खड़े हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि कुछ मकानों की ऊपरी मंजिलों पर पक्की छत के बजाय गाटर-पटिया का सहारा दिखाई दिया। कई जगह बीम और खंभों का सहारा भी नजर नहीं आया। स्थानीय लोगों के अनुसार, छोटे भूखंड पर अधिक से अधिक मंजिलें बनाने के पीछे किराये से ज्यादा कमाई की चाहत है।
नीचे खुद के रहने की जगह और ऊपर किराये के लिए कमरे बना दिए जाते हैं। बाहर से देखने पर ये मकान कई मंजिल ऊंचे नजर आते हैं, लेकिन उनकी बनावट और आसपास की स्थिति लोगों की चिंता बढ़ा रही है। इलाके में किराये पर रहने वाले शाहिद मिर्जा ने बताया कि कई मकानों की छत और दीवारों से समय-समय पर मलबा झड़ता है। इसके बावजूद ऊपर नई मंजिलें बनाई जाती रहीं।
बुधवार को इमारत गिरने के बाद आसपास के कई मकानों की दीवारों में दरारें भी दिखाई देने लगी हैं। इससे लोगों में डर बना हुआ है। पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि कई मकान इतनी संकरी गलियों में बने हैं कि एक साथ तीन लोगों का खड़ा होना भी मुश्किल है।