प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सीलिंग अधिकारी बनने की हामी भर कर गेंद अदालत के पाले में डाल दी है। इतना ही नहीं उन्होंने गोकलपुरी में डेयरी की सील तोड़ने के मामले में अदालत से माफी न मांगने का निर्णय कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राजधानी में भाजपा सीलिंग के लिए जिम्मेदार नहीं है। तिवारी के इस नए दांव से कांग्रेस व आप बैकफुट पर आ गई है।
अदालत की अवमानना मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में तीन अक्तूबर को है। मनोज तिवारी ने अदालत के निर्देश पर अपना जवाब दाखिल कर दिया। अदालत ने उनके टीवी में दिए साक्षात्कार को आधार बनाकर उन्हें सीलिंग अधिकारी बनाने और सीलिंग करवाने का ऑफर दिया था। दरअसल कहा गया था कि राजधानी में एक हजार से ज्यादा ऐसे भवन हैं, जहां सीलिंग होनी चाहिए, लेकिन नहीं की जा रही। अब तिवारी ने पेश जवाब में स्वयं को सीलिंग अधिकारी बनाने का ऑफर ही मंजूर नहीं किया बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई निगरानी कमेटी को भंग करने का तर्क रख दिया।