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दिल्ली: सीलिंग मुद्दे पर मनोज तिवारी ने गेंद अदालत के पाले में डाली, कल होगी सुनवाई

Tue, 02 Oct 2018 05:28 AM IST
विजय सिंघल , अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी ने सीलिंग अधिकारी बनने की हामी भर कर गेंद अदालत के पाले में डाल दी है। इतना ही नहीं उन्होंने गोकलपुरी में डेयरी की सील तोड़ने के मामले में अदालत से माफी न मांगने का निर्णय कर यह संदेश देने का प्रयास किया है कि राजधानी में भाजपा सीलिंग के लिए जिम्मेदार नहीं है। तिवारी के इस नए दांव से कांग्रेस व आप बैकफुट पर आ गई है। 

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अदालत की अवमानना मामले की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय में तीन अक्तूबर को है। मनोज तिवारी ने अदालत के निर्देश पर अपना जवाब दाखिल कर दिया। अदालत ने उनके टीवी में दिए साक्षात्कार को आधार बनाकर उन्हें सीलिंग अधिकारी बनाने और सीलिंग करवाने का ऑफर दिया था। दरअसल कहा गया था कि राजधानी में एक हजार से ज्यादा ऐसे भवन हैं, जहां सीलिंग होनी चाहिए, लेकिन नहीं की जा रही। अब तिवारी ने पेश जवाब में स्वयं को सीलिंग अधिकारी बनाने का ऑफर ही मंजूर नहीं किया बल्कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाई गई निगरानी कमेटी को भंग करने का तर्क रख दिया। 

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निगरानी कमेटी की भूमिका पर सवाल

तिवारी ने निगरानी कमेटी की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा सीलिंग 2006 से चल रही है और 12 वर्षो में निगरानी कमेटी कानून का राज स्थापित नहीं कर पाई। राजधानी में कुछ खास स्थानों पर सीलिंग क्यों नहीं हो रही। सीलिंग की चपेट में मात्र गरीब व छोटे दुकानदार आ रहे हैं। यह कौन सा कानून है कि गलत रूप से की गई सीलिंग को खुलवाने के लिए पहले एक लाख रुपये जमा करवाए जाएं?

कानून सभी के लिए बराबर है और इंसाफ मुफ्त में मिलना चाहिए। हालांकि तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना से बचते हुए निगरानी कमेटी पर प्रहार जरूर किए है। उनका कहना है कि निगरानी कमेटी स्वयं को सर्वोच्च अदालत समझने लगी है।

रेहड़ी-पटरी वालों के लिए लड़ते रहेंगे
तिवारी ने कहा वे अनधिकृत कॉलोनियों व रेहड़ी पटरी वालों के लिए लड़ते रहेंगे। स्पष्ट है कि तिवारी ने एक तय रणनीति के तहत शपथपत्र दाखिल करते हुए गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाली है। उन्होंने यह संदेश दिया है कि वे सीलिंग की चपेट में आने वालों के साथ हैं। कल तक कांग्रेस व आप उनकी पार्टी भाजपा को कटघरे में खड़ा कर रही थी अब तिवारी के नए दांव से दोनों पार्टियां असमंजस में आ गईं हैं। तिवारी को सीलिंग अधिकारी नहीं बनाया जाता तो भी उनकी जीत है और बनवाया गया तो निगरानी कमेटी का काम कुछ अरसे के लिए बंद हो जाएगा। 
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