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दिल्ली में फिर सीलिंग का साया, व्यापारियों की हालत खराब

Wed, 08 Aug 2018 10:20 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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sealing protest - फोटो : अमर उजाला
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दिल्ली के लाखों व्यापारियों को एक बार फिर से सीलिंग की चिंता सताने लगी है। बृहस्पतिवार से दिल्ली के विभिन्न इलाकों में सीलिंग शुरू होगी। कुछ माह से रुकी इस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया, जिसके बाद आनन-फानन में नगर निगम ने सीलिंग को लेकर सूची बनाना भी शुरू कर दिया है।

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पूर्वी दिल्ली क्षेत्र में करीब 600 से ज्यादा प्रॉपर्टी को सीलिंग के लिए सूची में डाला है। वहीं विश्वास नगर में व्यापारियों को नोटिस भी पहुंच चुके हैं। इसके अलावा आनंद पर्वत उद्योग क्षेत्र के व्यापारियों को भी सीलिंग को लेकर नोटिस मिलना शुरू हो चुका है।

वर्ष 1993 से लोहे का कारोबार कर रहे व्यापारी पुनीत गोयल का कहना है कि आनंद पर्वत औद्योगिक क्षेत्र के करीब 3 से 4 किमी के दायरे में किसी भी तरह की रिहायश नहीं है। उनकी तीन पीढ़ी इस व्यापार से जुड़ी हैं, लेकिन अब तक किसी भी तरह की प्रतिक्रिया उन्हें नगर निगम और सरकार से नहीं मिली।
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अब अचानक से एक पत्र के जरिए सीलिंग की जानकारी दी जा रही है। सरकार कर लेने के बाद भी किसी भी तरह की सुविधा नहीं दे रही। ऐसे में व्यापारियों का चिंतित होना स्वाभाविक है। वहीं पूर्वी दिल्ली के विश्वास नगर व्यापारी फेडरेशन ने सीलिंग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की है। 

कोर्ट इस शुक्रवार को सुनवाई करेगा। इस बीच निगरानी समिति के एक सदस्य ने बताया कि विश्वास नगर में 2000 फैक्ट्रियां शामिल हैं। पूर्वी दिल्ली के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो करीब एक हजार प्रॉपर्टी को सीलिंग के लिए सूची में डाला है। इसके अलावा उत्तरी निगम ने भी करीब 3000 फैक्ट्रियों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है। 

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छह माह में 6500 प्रॉपर्टी हुईं सील

छह माह में 6500 प्रॉपर्टी हुईं सील
मास्टर प्लान 2021 को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने और निगरानी समिति गठित करने के बाद से दिल्ली में सीलिंग का दंश व्यापारी झेल रहे हैं। करीब दो माह से व्यापारियों को राहत मिली हुई थी। इससे पहले छह माह में समिति ने विभिन्न क्षेत्रों को मिलाकर करीब 6500 प्रॉपर्टी को सील किया है।
 
सामान हटाने के लिए दे रहे हैं समय
समिति के एक सदस्य ने बताया कि नगर निगम के जरिए व्यापारियों को नोटिस भेजने की वजह समय देना है। अभी तक व्यापारियों की शिकायत थी कि उन्हें मोहलत नहीं दी गई। इसलिए कमेटी ने 48 घंटे की मोहलत देते हुए प्रॉपर्टी खाली कराने के निर्देश निगम के जरिए दिलवाना शुरू कर दिया है। इसके बाद भी अगर कोई व्यापारी प्रॉपर्टी खाली नहीं करता है तो भी सीलिंग की जाएगी।

त्रिनगर में 8000 फैक्ट्रियों पर तलवार
उत्तरी निगम क्षेत्र में आने वाले त्रिनगर में सीलिंग का सबसे ज्यादा खौफ देखने को मिल रहा है। यहां 8000 हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। करीब 5000 फैक्ट्रियों को अब तक नोटिस मिल चुका है। रिहायशी इलाकों का हवाला देते हुए यहां सीलिंग शुरू की जा रही है। 

वहीं समिति के सदस्य का कहना है कि यह इलाका मास्टर प्लान में रिहायशी और औद्योगिक मिश्रित भूमि इस्तेमाल में आता है, लेकिन मनमानी तरीके से अन्य बाजार की तरह यहां भी अवैध तरीके से फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। उधर व्यापारियों का कहना है कि इन फैक्ट्रियों में करीब 80 हजार मजदूर वर्ग काम करता है। सीलिंग से व्यापारियों के अलावा मजदूर भी मुसीबत में आएंगे। 
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