पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने तिवारी से कहा था कि आप जनप्रतिनिधि है, जिम्मेदार नागरिक हैं। आखिर आपको सील तोड़ने की इजाजत किसने दी? अगर सीलिंग गलत की गई थी तो आपको संबंधित अथॉरिटी के पास जाना चाहिए था।’
पीठ ने कहा था कि हम भीड़ के कानून से नहीं चलते बल्कि रूल ऑफ लॉ से चलते हैं। वहीं सांसद का कहना था कि उन्होंने न तो अदालत और न ही अदालत द्वारा गठित निगरानी समिति की अवहेलना की है।
सुप्रीम कोर्ट ने समिति की रिपोर्ट पर 19 सितंबर को तिवारी को अवमानना का नोटिस जारी किया था। सनद रहे कि न्यायालय की अवमानना का दोषी पाए जाने पर अधिकतम छह महीने की कैद की सजा का प्रावधान है या जुर्माना या दोनों। जुर्माने की रकम अधिकतम 2,000 रुपये हो सकती है।