- डॉक्टरों की चेतावनी, तनाव, मोटापा और दिल की बीमारियों का बढ़ रहा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मोबाइल और देर रात तक स्क्रीन देखने की बढ़ती आदत लोगों की नींद पर भारी पड़ रही है। धीरे-धीरे कम नींद लेना अब एक “नॉर्मल” लाइफस्टाइल बनता जा रहा है, जिसे विशेषज्ञ बेहद खतरनाक ट्रेंड मान रहे हैं। खासकर युवाओं और कामकाजी लोगों में देर रात तक सोशल मीडिया, ओटीटी और मोबाइल के इस्तेमाल से नींद का समय लगातार घट रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त नींद न लेना शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक है। लगातार नींद की कमी से तनाव, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा फोकस में कमी, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं।
गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि देर रात तक स्क्रीन देखने से दिमाग सक्रिय रहता है, जिससे नींद आने में देरी होती है। मोबाइल और लैपटॉप से निकलने वाली ब्लू लाइट स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन को प्रभावित करती है, जिससे नींद की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में ‘स्लीप डेफिसिट’ तेजी से बढ़ रहा है और लोग जरूरी 6-8 घंटे की नींद नहीं ले पा रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम और अनियमित दिनचर्या ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है। यदि समय रहते इस आदत पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह भविष्य में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन सकती है।
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क्यों खतरनाक है कम नींद -
स्ट्रेस और एंग्जायटी बढ़ती है
मोटापा और डायबिटीज का खतरा
दिल की बीमारियों की संभावना
याददाश्त और फोकस कमजोर
इम्यूनिटी पर असर
नींद सुधारने के आसान उपाय-
सोने से 1 घंटा पहले स्क्रीन बंद करें
रोज एक ही समय पर सोएं और उठें
रात में कैफीन और भारी भोजन से बचें
सोने से पहले मेडिटेशन या रिलैक्सेशन करें
बेडरूम को शांत और अंधेरा रखें